विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस 2026: जलग्रहण विकास और भूमि संरक्षण पर विशेष जोर
भारत में 17 जून 2026 को विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस व्यापक स्तर पर मनाया गया। यह आयोजन देशभर में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत संचालित जलग्रहण विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के 813 परियोजना क्षेत्रों में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि संसाधन विभाग के जलग्रहण प्रबंधन प्रभाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर भूमि संरक्षण, जल प्रबंधन और सूखा-निवारण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए अनेक गतिविधियां आयोजित की गईं।
डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 की प्रमुख विशेषताएं
डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 वर्ष 2021 से 2026 तक संचालित होने वाला एक महत्वपूर्ण जलग्रहण विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य देशभर में 49.50 लाख हेक्टेयर क्षतिग्रस्त और अवनत भूमि का पुनर्वास एवं विकास करना है। इस योजना के लिए 8,134 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा भूमि पुनर्स्थापन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना और कृषि उत्पादकता में सुधार लाना है।
देशभर में आयोजित प्रमुख गतिविधियां
विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए। देशभर में 1,444 नई जलग्रहण विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन किया गया, जबकि 8,341 पूर्ण हो चुकी परिसंपत्तियों का लोकार्पण किया गया। इन परिसंपत्तियों में जल संरक्षण संरचनाएं, चेक डैम, तालाब, खेत-तालाब और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत 51,299 पौधों का रोपण किया गया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान लोगों को “विकसित भारत के लिए, आइए सूखा-मुक्त भारत बनाएं” विषय पर सामूहिक शपथ भी दिलाई गई, जिससे जल संरक्षण और भूमि सुधार के प्रति जनभागीदारी को प्रोत्साहन मिला।
वैश्विक थीम और अंतरराष्ट्रीय महत्व
वर्ष 2026 के लिए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस की वैश्विक थीम “रेंजलैंड्स: रिकग्नाइज, रिस्पेक्ट, रिस्टोर” निर्धारित की गई है। यह थीम घासभूमि, झाड़ीदार क्षेत्र, सवाना और टुंड्रा जैसे पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के महत्व को रेखांकित करती है। इस वर्ष का वैश्विक आयोजन केन्या में आयोजित किया गया। संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (यूएनसीसीडी) के तहत प्रत्येक वर्ष 17 जून को यह दिवस मनाया जाता है ताकि भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और सूखे जैसी चुनौतियों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाई जा सके।
सामुदायिक भागीदारी का महत्व
इस अवसर पर स्थानीय समुदायों, पंचायत राज संस्थाओं, जलग्रहण समितियों, स्वयं सहायता समूहों तथा सरकारी अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। जलग्रहण विकास कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों के पुनरुद्धार से सीधे जुड़े हुए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1994 में विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस घोषित किया था।
- इस दिवस का पहला आयोजन वर्ष 1995 में किया गया था।
- संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (यूएनसीसीडी) तीन प्रमुख रियो कन्वेंशनों में से एक है।
- रेंजलैंड्स में घासभूमि, झाड़ीदार क्षेत्र, सवाना और टुंड्रा जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र शामिल होते हैं।
विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस 2026 का आयोजन भूमि और जल संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। जलग्रहण विकास, वृक्षारोपण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भारत सूखा-मुक्त और पर्यावरणीय रूप से अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है।