भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद का 10वां संस्करण बैंकॉक में आयोजित

भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद का 10वां संस्करण बैंकॉक में आयोजित

भारत और थाईलैंड के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 16 जून 2026 को बैंकॉक में 10वां थाईलैंड-भारत रक्षा संवाद आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, सैन्य संपर्क, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। यह संवाद दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रक्षा संवाद में प्रमुख प्रतिनिधित्व

इस संवाद की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के उप-स्थायी सचिव एडमिरल नुट्टापोल डियावानिच और भारत के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार तथा सैन्य क्षमताओं के विकास से संबंधित संभावित सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी को और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए।

रणनीतिक साझेदारी को मिल रही मजबूती

भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है। रक्षा संवाद इसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है, जिसके माध्यम से दोनों देश क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। बैठक में आसियान (ASEAN) के नेतृत्व वाले विभिन्न क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय रक्षा तंत्रों के अंतर्गत सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में भारत और थाईलैंड की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा

हिंद-प्रशांत क्षेत्र वर्तमान समय में वैश्विक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र हिंद महासागर से लेकर पश्चिमी और मध्य प्रशांत महासागर तक फैला हुआ है। दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, जिससे इसकी सामरिक महत्ता और बढ़ जाती है। संवाद के दौरान भारत और थाईलैंड ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों तथा सुरक्षा चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया।

रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

भारत और थाईलैंड के बीच रक्षा सहयोग कई आयामों में विकसित हो रहा है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, स्टाफ वार्ता, सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम और विभिन्न सेवाओं के बीच आदान-प्रदान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त समुद्री सहयोग के अंतर्गत नौसैनिक समन्वय, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और परिचालन स्तर पर संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी कार्य किया जा रहा है। इस प्रकार के रक्षा संवाद दोनों देशों को अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को समझने, अनुभव साझा करने और भविष्य के सहयोग की दिशा तय करने का अवसर प्रदान करते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आसियान (ASEAN) की स्थापना वर्ष 1967 में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।
  • भारत वर्ष 1992 में आसियान का सेक्टोरल डायलॉग पार्टनर बना और 2012 में उसे रणनीतिक साझेदार का दर्जा प्राप्त हुआ।
  • हिंद-प्रशांत अवधारणा वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों और रणनीतिक क्षेत्रों की परस्पर जुड़ी हुई संरचना को दर्शाती है।
  • रक्षा संवाद देशों के बीच सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण और सुरक्षा समन्वय की समीक्षा के लिए आयोजित औपचारिक बैठकें होती हैं।

भारत और थाईलैंड के बीच आयोजित 10वां रक्षा संवाद दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण संकेत है। रक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *