कनाडा के बिल C-22 पर बढ़ी निजता और एन्क्रिप्शन बहस
कनाडा में प्रस्तावित बिल C-22, जिसे सपोर्टिंग ऑथराइज्ड एक्सेस टू इंफॉर्मेशन एक्ट कहा जाता है, २०२६ में हाउस ऑफ कॉमन्स में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विधेयक को लेकर एप्पल और मेटा जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों ने चिंता जताई है। कंपनियों का कहना है कि इसके कुछ प्रावधान एन्क्रिप्शन, मेटाडेटा संग्रह और सरकारी निगरानी से जुड़े निजता अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या है बिल C-22
बिल C-22 कनाडा में कानूनी जांच एजेंसियों को डिजिटल सूचनाओं तक अधिकृत पहुंच देने से संबंधित प्रस्तावित कानून है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक सेवा प्रदाताओं, मेटाडेटा संग्रह और जांच एजेंसियों की शक्तियों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। विधेयक के भाग-२ के तहत सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री को यह अधिकार मिल सकता है कि वे कंपनियों को एक वर्ष तक मेटाडेटा सुरक्षित रखने का आदेश दें। इसमें डिवाइस डेटा, लोकेशन डेटा, रूटिंग जानकारी और ट्रांसमिशन डेटा शामिल हो सकते हैं।
एन्क्रिप्शन और निजता विवाद
एन्क्रिप्शन वह तकनीक है, जिसमें सामान्य जानकारी को कोडित रूप में बदला जाता है ताकि केवल अधिकृत व्यक्ति ही उसे पढ़ सके। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग मैसेजिंग और क्लाउड सेवाओं में व्यापक रूप से किया जाता है। एप्पल ने ६ मई २०२६ को कहा कि यह विधेयक कंपनियों को अपने उत्पादों में बैकडोर जोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है। वहीं मेटा के अधिकारियों का कहना है कि इससे कंपनियों को ऐसे तकनीकी प्रावधान बनाने पड़ सकते हैं, जो एन्क्रिप्शन को कमजोर कर दें।
सरकार और कंपनियों की अलग-अलग दलीलें
एप्पल और मेटा का तर्क है कि यह कानून उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और गोपनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है। एप्पल ने यह भी संकेत दिया कि यदि नियम अत्यधिक सख्त हुए तो कुछ सेवाएं या फीचर कनाडा से हटाए जा सकते हैं। दूसरी ओर कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि यह विधेयक आधुनिक सुरक्षा खतरों से निपटने और जांच प्रक्रिया को तेज बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
मेटाडेटा और कानूनी पहुंच
मेटाडेटा का अर्थ डेटा के बारे में जानकारी से है। इसमें संदेश का वास्तविक कंटेंट नहीं, बल्कि उससे जुड़ी तकनीकी जानकारी जैसे रूटिंग डेटा, डिवाइस पहचान और लोकेशन विवरण शामिल होते हैं। बिल के अनुसार मेटाडेटा संग्रह में संचार सामग्री या ब्राउज़िंग इतिहास शामिल नहीं होगा। हालांकि निजता समर्थकों का मानना है कि मेटाडेटा भी व्यक्ति की गतिविधियों के बारे में काफी जानकारी दे सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” बिल C-22 का आधिकारिक नाम सपोर्टिंग ऑथराइज्ड एक्सेस टू इंफॉर्मेशन एक्ट है। ” एप्पल और मेटा अमेरिका आधारित प्रमुख तकनीकी कंपनियां हैं। ” मेटाडेटा में रूटिंग डेटा, डिवाइस जानकारी और लोकेशन डेटा शामिल हो सकते हैं। ” कनाडाई अधिकार एवं स्वतंत्रता चार्टर देश के संवैधानिक ढांचे का हिस्सा है। कनाडा का यह प्रस्तावित कानून डिजिटल सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता के बीच संतुलन को लेकर वैश्विक बहस को और तेज कर रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सरकार सुरक्षा आवश्यकताओं और नागरिक स्वतंत्रताओं के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करती है।