ऑपरेशन रेजपिल के तहत भारत में पहली बार कैप्टागोन ड्रग की बड़ी खेप जब्त
भारत में पहली बार कैप्टागोन नामक प्रतिबंधित मादक पदार्थ की बड़ी खेप जब्त की गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने “ऑपरेशन रेजपिल” के तहत गुजरात के मुंद्रा पोर्ट और दक्षिण दिल्ली के नेब सराय इलाके में छापेमारी कर लगभग ₹182 करोड़ मूल्य की कैप्टागोन टैबलेट और पाउडर बरामद किए। इस मामले में एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार भी किया गया है। यह कार्रवाई भारत की एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि देश में पहली बार कैप्टागोन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित सिंथेटिक ड्रग की इतनी बड़ी खेप पकड़ी गई है।
क्या है कैप्टागोन?
कैप्टागोन एक सिंथेटिक उत्तेजक पदार्थ है, जिसे फेनेथाइलीन नामक रसायन से जोड़ा जाता है। इसका विकास 1960 के दशक में किया गया था। शुरुआत में इसका उपयोग कुछ चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए किया जाता था, लेकिन बाद में इसके दुरुपयोग और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण कई देशों में इसे नियंत्रित मनोप्रभावी पदार्थ घोषित कर दिया गया। यह ड्रग मानसिक उत्तेजना बढ़ाने और थकान कम करने के लिए अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाता है। पश्चिम एशिया में इसकी तस्करी और अवैध व्यापार लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रहा है।
ऑपरेशन रेजपिल और जब्ती की पूरी कार्रवाई
एनसीबी द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन रेजपिल” के दौरान कुल 227.7 किलोग्राम कैप्टागोन टैबलेट और 196.2 किलोग्राम कैप्टागोन पाउडर बरामद किया गया। तस्करों ने इस खेप को छिपाने के लिए ऊन के कंटेनर, चाय की पत्तियों के डिब्बों और व्यावसायिक चपाती काटने वाली मशीन का उपयोग किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह खेप मुख्य रूप से मध्य पूर्व के देशों, विशेषकर सऊदी अरब, भेजी जानी थी। यह मामला अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क और भारत के बंदरगाहों के उपयोग को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
गिरफ्तार सीरियाई नागरिक और जांच
इस मामले में गिरफ्तार सीरियाई नागरिक 15 नवंबर 2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था। उसका वीजा 12 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद वह भारत में अवैध रूप से रह रहा था। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की जांच कर रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।
भारत की एंटी-नारकोटिक्स व्यवस्था
भारत में मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 लागू है। इसके तहत ड्रग तस्करी, उत्पादन और वितरण पर कड़ी सजा का प्रावधान है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली केंद्रीय एजेंसी है, जो देशभर में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाती है। सीमा शुल्क विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियां भी संयुक्त रूप से ड्रग तस्करी रोकने में सहयोग करती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कैप्टागोन का संबंध फेनेथाइलीन नामक सिंथेटिक उत्तेजक पदार्थ से है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भारत में ड्रग कानून लागू करने वाली केंद्रीय एजेंसी है।
- मुंद्रा पोर्ट गुजरात का प्रमुख व्यावसायिक बंदरगाह है।
- सऊदी अरब को पश्चिम एशिया के प्रमुख ड्रग तस्करी मार्गों में अक्सर शामिल किया जाता है।
भारत में कैप्टागोन की पहली बड़ी जब्ती यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क लगातार नए रास्तों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और समन्वित कार्रवाई देश की आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।