भारत ने तेज की अपतटीय तेल और गैस खोज अभियान की प्रक्रिया

भारत ने तेज की अपतटीय तेल और गैस खोज अभियान की प्रक्रिया

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से अपतटीय यानी समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को तेज कर दिया है। इसके तहत बंगाल की खाड़ी और आसपास के समुद्री बेसिनों में बड़े पैमाने पर सिस्मिक सर्वे, स्ट्रैटिग्राफिक ड्रिलिंग और नई बोली प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन कार्यरत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स इस व्यापक अभियान का नेतृत्व कर रहा है।

भारत के प्रमुख अपतटीय अवसादी बेसिन

भारत के अपतटीय अवसादी बेसिनों में बंगाल ऑफशोर बेसिन, महानदी बेसिन, कृष्णा-गोदावरी बेसिन, कावेरी बेसिन, सौराष्ट्र बेसिन और अंडमान बेसिन शामिल हैं। ये क्षेत्र भारत के तेल और गैस अन्वेषण के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं और इनमें गहरे समुद्र तथा उथले जल दोनों प्रकार की संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन बेसिनों में बड़े पैमाने पर हाइड्रोकार्बन भंडार मौजूद हो सकते हैं, जो भविष्य में भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सिस्मिक सर्वे और स्ट्रैटिग्राफिक ड्रिलिंग क्या है?

सिस्मिक सर्वे एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें ध्वनि तरंगों की सहायता से समुद्र के नीचे की चट्टानी परतों का अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य संभावित तेल और गैस भंडार वाले क्षेत्रों की पहचान करना होता है। वहीं स्ट्रैटिग्राफिक ड्रिलिंग के माध्यम से समुद्र के नीचे से चट्टानों के नमूने और भूगर्भीय आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। यह प्रक्रिया पूर्ण उत्पादन ड्रिलिंग शुरू करने से पहले की जाती है ताकि क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का आकलन किया जा सके। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स वर्तमान में लगभग 1,61,000 लाइन किलोमीटर क्षेत्र में सिस्मिक सर्वे कर रहा है, जिसे हाल के वर्षों में भारत का सबसे बड़ा अपतटीय सर्वेक्षण माना जा रहा है।

अंडमान बेसिन और नई संभावनाएं

अंडमान बेसिन को भारत का एक फ्रंटियर एक्सप्लोरेशन क्षेत्र माना जाता है। इसकी भूगर्भीय संरचना म्यांमार और इंडोनेशिया के गैस उत्पादक क्षेत्रों से मिलती-जुलती बताई जाती है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन और ऑयल इंडिया ने 2026 की शुरुआत में स्ट्रैटिग्राफिक ड्रिलिंग अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। पहले चरण में अंडमान, महानदी, सौराष्ट्र और बंगाल बेसिन में चार गहरे समुद्री कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी।

हाइड्रोकार्बन नीति और लाइसेंसिंग व्यवस्था

भारत में तेल और गैस अन्वेषण को हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत संचालित किया जाता है। इसके अंतर्गत ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम कंपनियों को उपलब्ध क्षेत्रों में अपनी पसंद के ब्लॉक चुनकर बोली लगाने की अनुमति देता है। भारत ने वर्ष 2022 में लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के उन समुद्री क्षेत्रों को भी अन्वेषण के लिए खोल दिया था, जिन्हें पहले “नो-गो” क्षेत्र माना जाता था। इससे निजी और सरकारी कंपनियों के लिए नए अवसर उपलब्ध हुए हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • बंगाल की खाड़ी भारत का प्रमुख अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षेत्र माना जाता है।
  • 3डी सिस्मिक डेटा का उपयोग समुद्र के नीचे की भूगर्भीय संरचनाओं की विस्तृत तस्वीर तैयार करने के लिए किया जाता है।
  • ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के 10वें दौर में 25 तेल और गैस ब्लॉक पेश किए गए थे।

भारत का यह व्यापक अपतटीय अन्वेषण अभियान देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि इन समुद्री क्षेत्रों में बड़े भंडार मिलते हैं, तो इससे आयात पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।

Originally written on May 16, 2026 and last modified on May 16, 2026.