ऑक्सफोर्ड और सीरम इंस्टीट्यूट मिलकर बनाएंगे नई मलेरिया वैक्सीन R78C

ऑक्सफोर्ड और सीरम इंस्टीट्यूट मिलकर बनाएंगे नई मलेरिया वैक्सीन R78C

मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने एक महत्वपूर्ण लाइसेंसिंग समझौता किया है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर R78C नामक अगली पीढ़ी की मलेरिया वैक्सीन का विकास और निर्माण करेंगे।

यह वैक्सीन विशेष रूप से प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम नामक परजीवी को निशाना बनाएगी, जो मलेरिया के सबसे गंभीर और घातक संक्रमणों के लिए जिम्मेदार होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि R78C अधिक मजबूत और लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

क्या है R78C मलेरिया वैक्सीन

R78C वैक्सीन मलेरिया परजीवी के जीवनचक्र के कई चरणों को लक्षित करने के लिए विकसित की जा रही है। पहले की अधिकांश वैक्सीन केवल संक्रमण के एक चरण पर केंद्रित थीं, लेकिन R78C दो ब्लड-स्टेज एंटीजन—RIPR और CyPRA—पर आधारित है।

इसका उद्देश्य परजीवी को शरीर में कई चरणों में रोकना है, जिससे संक्रमण की गंभीरता कम हो, रोग के फैलाव की संभावना घटे और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अधिक मजबूत बने। यह मलेरिया वैक्सीन अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक बदलाव माना जा रहा है।

ऑक्सफोर्ड और सीरम साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है, जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और वैश्विक वितरण की क्षमता रखता है। यदि R78C सफल होती है, तो इसे कम लागत पर बड़े स्तर पर उपलब्ध कराया जा सकेगा, विशेषकर उन निम्न आय वाले देशों में जहां मलेरिया सबसे अधिक फैलता है।

यह साझेदारी ऑक्सफोर्ड और SII के पहले के सहयोग पर भी आधारित है, जिसमें WHO द्वारा अनुशंसित R21/Matrix-M मलेरिया वैक्सीन शामिल है।

मौजूदा वैक्सीन से कैसे अलग है

R21/Matrix-M जैसी वर्तमान मलेरिया वैक्सीन मुख्य रूप से स्पोरोज़ोइट चरण को लक्षित करती हैं, जब परजीवी पहली बार मानव शरीर में प्रवेश करता है। क्लिनिकल परीक्षणों में R21 ने कुछ क्षेत्रों में लगभग 75 प्रतिशत तक मलेरिया के मामलों को कम किया है।

वहीं R78C ब्लड-स्टेज को निशाना बनाती है, जहां रोग गंभीर रूप लेता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बहु-चरणीय वैक्सीन भविष्य में अधिक प्रभावी सुरक्षा दे सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया का सबसे घातक परजीवी है।
  • मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे में स्थित है।
  • R21/Matrix-M को WHO ने मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के लिए अनुशंसित किया है।

R78C वैक्सीन अभी अनुसंधान और क्लिनिकल परीक्षण के चरण में है, लेकिन इसकी सफलता मलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। यदि यह वैक्सीन प्रभावी सिद्ध होती है, तो दुनिया मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती है।

Originally written on April 29, 2026 and last modified on April 29, 2026.

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