ऑक्सफोर्ड अध्ययन में बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई को बताया गया उच्च ताप जोखिम वाले शहर

ऑक्सफोर्ड अध्ययन में बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई को बताया गया उच्च ताप जोखिम वाले शहर

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड द्वारा 10 जून 2026 को जारी एक अध्ययन में भारत के चार प्रमुख महानगरों—बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई—को दुनिया के शीर्ष 50 ऐसे शहरी केंद्रों में शामिल किया गया है जो गंभीर ताप जोखिम (हीट रिस्क) का सामना कर रहे हैं। यह अध्ययन ‘सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटीज’ नामक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में ताप जोखिम का आकलन उच्च तापमान के संपर्क, जनसंख्या की संवेदनशीलता और शहरों की प्रतिक्रिया क्षमता के आधार पर किया गया।

हीट रिस्क आकलन कैसे किया जाता है?

ताप जोखिम या हीट रिस्क का मूल्यांकन सामान्यतः तीन प्रमुख घटकों के आधार पर किया जाता है। पहला, अत्यधिक तापमान के संपर्क की मात्रा; दूसरा, प्रभावित आबादी की संवेदनशीलता; और तीसरा, किसी शहर की उस स्थिति से निपटने की क्षमता। इस प्रक्रिया में तापमान की चरम स्थितियां, जनसंख्या घनत्व, आवासीय परिस्थितियां, शीतलन सुविधाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दबाव जैसे कारकों का अध्ययन किया जाता है। इन सभी तत्वों को मिलाकर किसी शहर का समग्र हीट रिस्क स्कोर निर्धारित किया जाता है।

भारतीय शहरों की वैश्विक रैंकिंग

अध्ययन के अनुसार हैदराबाद दुनिया के 30 सबसे अधिक ताप-संवेदनशील शहरों में शामिल है। इसका समग्र हीट रिस्क स्कोर 0.68 दर्ज किया गया। बेंगलुरु का स्कोर 0.69 रहा, जबकि चेन्नई का स्कोर 0.64 और मुंबई का स्कोर 0.63 रहा। मुंबई को वैश्विक स्तर पर 46वां स्थान मिला। रिपोर्ट में कुल 14 भारतीय शहरों को दुनिया के शीर्ष 50 उच्च ताप जोखिम वाले शहरी क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जो भारत में बढ़ते शहरी ताप संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

बढ़ती गर्मी और शहरीकरण का प्रभाव

अध्ययन में बताया गया कि हैदराबाद में 1 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच कम से कम 47 दिन ऐसे रहे जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। यह पिछले एक दशक में सबसे अधिक संख्या है। मार्च 2026 में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया द्वारा प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि भारत के शहरी क्षेत्र आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत अधिक तेजी से गर्म हो सकते हैं। वहीं, वर्ष 2025 में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार भारतीय शहरों में तापमान वृद्धि की दर 0.53 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.26 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक है।

भारत में हीट रिस्क की व्यापक चुनौती

ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) ने जून 2026 में कहा कि भारत की 76 प्रतिशत से अधिक आबादी अत्यधिक गर्मी के उच्च या बहुत उच्च जोखिम का सामना कर रही है। बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट संरचनाओं के विस्तार, हरित क्षेत्रों में कमी और जलवायु परिवर्तन को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। वर्ष 2025 की एक जलवायु जोखिम रिपोर्ट में भी बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद को गर्मी, बाढ़ और समुद्र स्तर में वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना करने वाले प्रमुख भारतीय शहरों में शामिल किया गया था।

शहरी नियोजन में बढ़ती आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ताप जोखिम को कम करने के लिए शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, जल निकायों का संरक्षण करने, टिकाऊ भवन निर्माण तकनीकों को अपनाने और प्रभावी हीट एक्शन प्लान तैयार करने की आवश्यकता होगी। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए शहरी नियोजन में ताप जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता देना समय की मांग बन चुका है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड यूनाइटेड किंगडम की एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक शोध विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 12वीं शताब्दी में हुई थी।
  • ‘सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटीज’ शहरी स्थिरता और जलवायु संबंधी विषयों पर केंद्रित एक समीक्षित शोध पत्रिका है।
  • अत्यधिक गर्मी को शहरी जोखिम मूल्यांकन ढांचे में एक प्रमुख जलवायु खतरे के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • भारत में शहरी क्षेत्रों का तापमान वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक तेज़ पाई गई है।
  • सीईईडब्ल्यू भारत की एक प्रमुख नीति अनुसंधान संस्था है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के इस अध्ययन ने भारत के प्रमुख शहरों में बढ़ते ताप जोखिम की गंभीरता को उजागर किया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच शहरों के लिए टिकाऊ विकास और प्रभावी ताप प्रबंधन रणनीतियां अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में अत्यधिक गर्मी सार्वजनिक स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और जीवन गुणवत्ता पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

Originally written on June 11, 2026 and last modified on June 11, 2026.

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