एफएसएसएआई ने भ्रामक दावों पर तीन खाद्य कंपनियों को जारी किए नोटिस
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 6 जुलाई 2026 को हेरिटेज फूड्स लिमिटेड, डिया फूड्स और सिप्ज़र न्यूट्रास्यूटिकल्स को कथित भ्रामक दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किए। एफएसएसएआई ने इन कंपनियों से सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
एफएसएसएआई की भूमिका और नियामक व्यवस्था
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की स्थापना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई थी। यह देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षा, पैकेजिंग, लेबलिंग, खाद्य योजकों और विज्ञापन संबंधी दावों के लिए मानक तय करता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 के अंतर्गत “फ्रेश”, “हेल्दी”, “ऑर्गेनिक” और “वीगन” जैसे शब्दों के उपयोग के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को भ्रामक जानकारी से बचाया जा सके।
हेरिटेज फूड्स पर क्या आपत्ति जताई गई?
एफएसएसएआई ने हेरिटेज फूड्स लिमिटेड को उसके उत्पाद “हेरिटेज फ्रेश पनीर” के संबंध में नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण के अनुसार, “फ्रेश पनीर” शब्द का उपयोग अनुसूची-5 में निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके अलावा, कंपनी द्वारा “हेल्दी हैप्पीनेस” नाम में “हेल्दी” शब्द के उपयोग पर भी आपत्ति जताई गई है। नियामक का कहना है कि ऐसे दावों का उपयोग निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार ही किया जा सकता है।
डिया फूड्स और सिप्ज़र न्यूट्रास्यूटिकल्स पर भी कार्रवाई
डिया फूड्स को उसके “ला कासा वीगन हेज़लनट चॉकलेट स्प्रेड” पर “ऑल नेचुरल”, “100 प्रतिशत ऑर्गेनिक” और “वीगन” जैसे दावों के लिए नोटिस भेजा गया है। एफएसएसएआई के अनुसार, ऐसे दावों के लिए संबंधित नियमों का पालन और आवश्यक स्वीकृतियों का होना अनिवार्य है। वहीं, सिप्ज़र न्यूट्रास्यूटिकल्स को उसके “जूस कैप्सूल्स” पर “एफएसएसएआई अप्रूव्ड”, “प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है”, “शरीर से विषैले तत्व निकालता है” तथा “ऑर्गेनिक सब्जियों से निर्मित” जैसे दावों के संबंध में नोटिस जारी किया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन दावों के समर्थन में आवश्यक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए गए।
उपभोक्ता हितों की सुरक्षा पर जोर
एफएसएसएआई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और लेबलिंग पूरी तरह तथ्यात्मक, प्रमाणित और उपभोक्ताओं को भ्रमित न करने वाले हों। भ्रामक दावे न केवल उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि खाद्य उद्योग में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए नियामक समय-समय पर कंपनियों की निगरानी कर आवश्यक कार्रवाई करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) भारत का सर्वोच्च खाद्य नियामक निकाय है।
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 भारत में खाद्य सुरक्षा और नियमन का प्रमुख कानूनी आधार है।
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 के तहत “फ्रेश”, “हेल्दी”, “ऑर्गेनिक” और “वीगन” जैसे शब्दों के उपयोग के लिए निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य है।
- एफएसएसएआई खाद्य कारोबार संचालकों को लाइसेंस जारी करता है, लेकिन किसी व्यक्तिगत खाद्य उत्पाद को “एफएसएसएआई अप्रूव्ड” घोषित नहीं करता।
एफएसएसएआई की यह कार्रवाई दर्शाती है कि उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावों की वैज्ञानिक पुष्टि और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करना न केवल उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि खाद्य उद्योग में गुणवत्ता और जवाबदेही को भी बढ़ावा देगा।