एआई आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिली नई औद्योगिक मदद

एआई आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिली नई औद्योगिक मदद

देश में स्वास्थ्य तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम के तहत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने विशाखापत्तनम की कंपनी एम/एस ग्रिवा हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के साथ ग्रिवाविजन के व्यावसायीकरण के लिए समझौता किया है। यह एक स्वदेशी, एआई-संचालित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग डिवाइस है, जिसे क्लिनिकल उपयोग के लिए पोर्टेबल डिजिटल कोलपोस्कोप के रूप में विकसित किया गया है।

ग्रिवाविजन क्या है और यह कैसे काम करता है

ग्रिवाविजन को महिलाओं की नियमित जांच के दौरान गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती बदलावों की पहचान में मदद के लिए तैयार किया गया है। इसमें भारतीय पेटेंट वाला हार्डवेयर, उन्नत ऑप्टिक्स, हाई-डेफिनिशन कैमरा और इन-बिल्ट डिस्प्ले शामिल हैं। एआई-सहायता प्राप्त सॉफ्टवेयर की मदद से यह गाइनेकोलॉजिस्ट को प्री-कैंसरस असामान्यताओं को पहचानने में सहायता देता है।

यह तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सर्वाइकल कैंसर की समय रहते पहचान इलाज की संभावना बढ़ाती है। पोर्टेबल स्वरूप होने के कारण इसे क्लिनिकल सेटिंग्स में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्क्रीनिंग को अधिक सुलभ बनाने में मदद मिल सकती है।

मानक, नियमन और डिजिटल स्वास्थ्य से जुड़ाव

यह उपकरण क्लास B नॉन-इनवेसिव मेडिकल डिवाइस के रूप में वर्गीकृत है। इसे ISO 13485 गुणवत्ता मानकों के तहत विकसित किया गया है और इसके पास केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) का विनिर्माण लाइसेंस भी है। इससे इसके नियामकीय अनुपालन और गुणवत्ता प्रक्रिया की पुष्टि होती है।

ग्रिवाविजन का सॉफ्टवेयर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अनुरूप है और इसकी स्क्रीनिंग प्रणाली WHO-स्वीकृत Automated Visual Evaluation (AVE) मानकों के साथ मेल खाती है। यह डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे के साथ इसके एकीकरण को दर्शाता है।

उत्पादन विस्तार और स्वदेशी निर्माण पर जोर

समझौते के तहत ग्रिवा हेल्थकेयर अब विशाखापत्तनम स्थित AIC-AMTZ Medivalley में अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों से आगे बढ़कर केरल के कोल्लम में व्यावसायिक स्तर के निर्माण संयंत्र की ओर जाएगी। कंपनी के 50 प्रतिशत से अधिक घटक भारत में ही स्रोत किए जाते हैं, जो स्वदेशी निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम संकेत है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
  • कोलपोस्कोपी एक चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसमें गर्भाशय ग्रीवा, योनि और वल्वा की आवर्धन के साथ जांच की जाती है।
  • ISO 13485 मेडिकल डिवाइस के लिए गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय मानक है।
  • क्लास B मेडिकल डिवाइस सामान्यतः कम से मध्यम जोखिम श्रेणी में रखे जाते हैं।

इस पहल से स्पष्ट है कि भारत में एआई, डिजिटल हेल्थ और स्वदेशी विनिर्माण का मेल अब चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Originally written on August 11, 2026 and last modified on August 11, 2026.

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