आईसीएमआर की S.H.I.N.E. पहल से स्कूली छात्रों को विज्ञान और स्वास्थ्य अनुसंधान की झलक
स्वास्थ्य अनुसंधान और विज्ञान शिक्षा को स्कूल स्तर तक ले जाने के लिए विभागीय संस्थान एक बार फिर S.H.I.N.E. (Science, Health and Innovation for NextGen Explorers) कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं। यह दूसरा संस्करण 11 और 12 अगस्त 2026 को होगा और देशभर के 83 स्थानों पर कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को जोड़ेगा।
क्या है S.H.I.N.E. कार्यक्रम
S.H.I.N.E. एक राष्ट्रीय स्कूल आउटरीच पहल है, जिसका उद्देश्य छात्रों को विज्ञान, स्वास्थ्य और नवाचार की दुनिया से सीधे जोड़ना है। 2026 संस्करण में लगभग 30,000 छात्रों की भागीदारी का अनुमान है, जो 2025 में हुए पहले संस्करण की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के विद्यार्थी शामिल होंगे।
कहां और कैसे होंगे आयोजन
यह कार्यक्रम आईसीएमआर संस्थानों, डीएचआर-Model Rural Health Research Units (MRHRUs) और उनसे संबद्ध फील्ड इकाइयों में आयोजित किया जाएगा। छात्रों के लिए प्रयोगशाला भ्रमण, शोध प्रदर्शनियां, लाइव डेमो और स्वास्थ्य वैज्ञानिकों से सीधी बातचीत जैसी गतिविधियां रखी गई हैं। इन सभी सत्रों में भागीदारी पूरी तरह निःशुल्क होगी।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह पहल
यह आउटरीच कार्यक्रम छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें शोध की वास्तविक प्रक्रिया, प्रयोगशाला कार्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों की समझ देता है। कार्यक्रम का विचार “एक दिन वैज्ञानिक की तरह” अनुभव देने पर आधारित है। इसके साथ ही कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता भी रखी गई है, जो विकसित भारत 2047 की सोच से जुड़ी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईसीएमआर भारत की शीर्ष जैव-चिकित्सीय अनुसंधान संस्था है और यह स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अधीन काम करती है।
- MRHRUs यानी Model Rural Health Research Units ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान से जुड़ी फील्ड इकाइयाँ हैं।
- विकसित भारत 2047, भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने से जुड़ा राष्ट्रीय विजन है।
- प्रो. वी. रामलिंगस्वामी आईसीएमआर के महानिदेशक रहे थे और वे भारत के प्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं।
2026 का यह संस्करण प्रो. वी. रामलिंगस्वामी की जयंती और उनके योगदान की स्मृति को भी समर्पित है। कुल मिलाकर, यह पहल स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक सोच, स्वास्थ्य जागरूकता और अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।