एआईएम-एसटीपीआई साझेदारी: जीसीसी कॉन्क्लेव 2026 से नवाचार और स्टार्टअप विकास को नई दिशा
भारत में नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अटल नवाचार मिशन (एआईएम) और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) ने 30 जून 2026 को बेंगलुरु में जीसीसी कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026 का आयोजन किया। इस सम्मेलन में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप, इनक्यूबेटर और नीति-निर्माताओं ने भाग लेकर भारत में नवाचार तंत्र को मजबूत बनाने और उद्योगों के साथ स्टार्टअप के बेहतर समन्वय पर चर्चा की।
अटल नवाचार मिशन और एसटीपीआई की भूमिका
अटल नवाचार मिशन (एआईएम) नीति आयोग की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना है। यह मिशन स्कूल स्तर से लेकर स्टार्टअप और उद्योगों तक नवाचार की एक मजबूत श्रृंखला विकसित करने पर कार्य करता है। वहीं, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना 1991 में सॉफ्टवेयर निर्यात को बढ़ावा देने तथा तकनीकी उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए की गई थी। एसटीपीआई देशभर में प्रौद्योगिकी पार्क और इनक्यूबेशन केंद्र संचालित करता है, जिससे नवाचार आधारित उद्योगों को आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का महत्व
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) बहुराष्ट्रीय कंपनियों की वे इकाइयाँ होती हैं, जो प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, डेटा विश्लेषण, वित्त और व्यावसायिक सहायता जैसी सेवाएँ प्रदान करती हैं। वर्तमान में भारत में 2,100 से अधिक जीसीसी संचालित हैं, जो प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं। बेंगलुरु को भारत का प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और जीसीसी केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि इस सम्मेलन का आयोजन भी इसी शहर में किया गया।
एएसीईएसएस औद्योगिक त्वरक कार्यक्रम
सम्मेलन के दौरान एएसीईएसएस (अटल एक्सेलेरेशन सेंटर्स फॉर स्केल-अप ऑफ स्टार्टअप्स) औद्योगिक त्वरक कार्यक्रम पर विशेष चर्चा हुई। इस प्रस्तावित कार्यक्रम का उद्देश्य विकास के चरण में मौजूद स्टार्टअप को उद्योगों के परीक्षण वातावरण, पायलट परियोजनाओं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन तक पहुँच उपलब्ध कराना है। इस पहल से नवाचार को प्रयोगशालाओं से निकालकर उद्योगों तक पहुँचाने और स्टार्टअप को व्यावसायिक स्तर पर सफल बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
नवाचार से उद्यम तक की यात्रा
कॉन्क्लेव में विद्यालय स्तर के नवाचार, स्टार्टअप विकास और बड़े उद्योगों तक उनके विस्तार के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में इंटेल, आईबीएम, बॉश, अमेज़न, एसएपी, एनवीडिया, सैमसंग, शेल, मर्सिडीज-बेंज, फिलिप्स, मॉर्गन स्टेनली, विप्रो और याहू जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह साझेदारी विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अटल नवाचार मिशन (एआईएम) की शुरुआत वर्ष 2016 में नीति आयोग के अंतर्गत राष्ट्रीय नवाचार और उद्यमिता मंच के रूप में की गई थी।
- सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की स्थापना वर्ष 1991 में सॉफ्टवेयर निर्यात और तकनीकी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हुई थी।
- भारत में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर संचालित हैं, जो प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं।
- विकसित भारत 2047 भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का दीर्घकालिक राष्ट्रीय विज़न है।
एआईएम और एसटीपीआई की यह साझेदारी भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को उद्योगों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्टार्टअप को नई तकनीकी सुविधाएँ, उद्योगों का सहयोग और वैश्विक अवसर प्राप्त होंगे, जिससे भारत नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।