उदयपुर में BRICS प्रतिस्पर्धा सहयोग से हरित अर्थव्यवस्था को नई दिशा
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 8 अगस्त 2026 को राजस्थान के उदयपुर में BRICS प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों की बैठक की मेजबानी की। भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के तहत हुई इस बैठक में सदस्य देशों के प्रतिस्पर्धा नियामकों के प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना और प्रतिस्पर्धा नीति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना रहा।
नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों पर साझा रुख
बैठक में “Strengthening Cooperation to Promote Fair Competition, including in Renewable Energy Markets” शीर्षक से एक संयुक्त वक्तव्य अपनाया गया। यह संकेत देता है कि BRICS देश अब हरित ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती निवेश गतिविधियों, बाजार संरचना और प्रतिस्पर्धी व्यवहार पर अधिक समन्वित दृष्टिकोण अपनाना चाहते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा आज केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि औद्योगिक नीति, निवेश और तकनीकी नवाचार से जुड़ा बड़ा आर्थिक क्षेत्र बन चुकी है।
इसी बैठक में “Emerging Competition Landscape in the Renewable Energy Sector in BRICS” नामक एक सहयोगी अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य BRICS देशों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की बाजार गतिशीलता को समझना और भविष्य में नीति-स्तरीय सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करना था।
डिजिटल बाजार और नई तकनीकों पर भी चर्चा
BRICS प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों ने डिजिटल बाजारों और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े सीमा-पार मुद्दों पर ज्ञान-साझाकरण और संवाद को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा की। ऐसे मुद्दों में प्लेटफॉर्म प्रतिस्पर्धा, डेटा-आधारित कारोबारी मॉडल और अलग-अलग देशों के बीच नियामकीय समन्वय जैसी चुनौतियां शामिल होती हैं।
आज के वैश्विक बाजार में डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संक्रमण, दोनों ही क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा नीति की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कारण BRICS जैसे मंचों पर नियामकों के बीच संवाद न केवल नीति-निर्माण को आसान बनाता है, बल्कि बड़े बाजारों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को भी बढ़ावा देता है।
भारत की भूमिका और CCI की अहमियत
इस बैठक में CCI की अध्यक्ष रवीनीत कौर ने उद्घाटन भाषण दिया। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के तहत भारत का वैधानिक प्रतिस्पर्धा नियामक है। इसका काम प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों, प्रभुत्व के दुरुपयोग और विलय या संयोजन जैसे मामलों की निगरानी करना है।
उदयपुर में BRICS प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों की यह बैठक भारत की उस भूमिका को भी रेखांकित करती है, जिसमें वह वैश्विक आर्थिक शासन, नियामकीय सहयोग और उभरते बाजारों के बीच नीति समन्वय को आगे बढ़ाने में सक्रिय है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी।
- BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी।
- प्रतिस्पर्धा प्राधिकरण आम तौर पर कार्टेल, प्रभुत्व के दुरुपयोग और विलय/संयोजन से जुड़े मामलों को देखते हैं।
- उदयपुर ने इससे पहले 2016 में भी एक BRICS आयोजन की मेजबानी की थी।
यह बैठक दिखाती है कि BRICS देशों के लिए प्रतिस्पर्धा नीति अब केवल पारंपरिक बाजार नियमन तक सीमित नहीं है, बल्कि हरित ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।