उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना का पोर्टल शुरू
उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारजनों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत एक समर्पित पंजीकरण पोर्टल शुरू किया है। 6 जून 2026 को लॉन्च किए गए इस पोर्टल के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक योजना में पंजीकरण कर सकेंगे और चिकित्सा कार्ड प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य
मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना की घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर की थी। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने इस योजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान की। योजना का उद्देश्य शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारजनों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि चिकित्सा खर्च का बोझ कम किया जा सके और समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके।
किन लोगों को मिलेगा लाभ?
यह योजना बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कवर करती है। योजना के अंतर्गत लगभग 11.95 लाख लाभार्थी बेसिक शिक्षा विभाग से और लगभग 2.97 लाख लाभार्थी माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त 10 मार्च 2026 तक इस योजना का विस्तार उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी कर दिया गया, जिससे 2 लाख से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने लगा।
उपचार की सुविधा और कवरेज
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुविधा का उद्देश्य गंभीर बीमारियों और महंगे उपचारों के दौरान आर्थिक बोझ को कम करना है। लाभार्थियों को उपचार के समय सीधे भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि खर्च योजना के तहत वहन किया जाएगा।
वित्तीय प्रावधान
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों के लिए इस योजना पर प्रतिवर्ष लगभग 448 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें—
- बेसिक शिक्षा विभाग के लिए लगभग 358.61 करोड़ रुपये
- माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए लगभग 89.25 करोड़ रुपये
का प्रावधान किया गया है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में इस योजना पर प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
आयुष्मान भारत के मॉडल पर आधारित
मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना का ढांचा आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप तैयार किया गया है। उपचार की दरें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार तय की गई हैं। इससे लाभार्थियों को मानकीकृत और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
पंजीकरण प्रक्रिया
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों को पोर्टल पर आधार ई-केवाईसी (Aadhaar e-KYC) प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सत्यापन पूरा होने के बाद वे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे, जिसके माध्यम से अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा प्राप्त होगी।
पात्रता संबंधी प्रावधान
जो व्यक्ति पहले से किसी अन्य केंद्रीय या राज्य सरकार की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें इस योजना के तहत दोहरा लाभ नहीं मिलेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना की घोषणा 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर की गई थी।
- उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने योजना को 29 जनवरी 2026 को मंजूरी दी।
- योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
- लगभग 11.95 लाख बेसिक शिक्षा और 2.97 लाख माध्यमिक शिक्षा विभाग के लाभार्थी योजना के दायरे में हैं।
- आयुष्मान भारत भारत की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था।
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत का प्रमुख घटक है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) आयुष्मान भारत के क्रियान्वयन की शीर्ष संस्था है।
- आधार ई-केवाईसी डिजिटल पहचान सत्यापन की प्रक्रिया है।
मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना उत्तर प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा पहल है। यह योजना स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, आर्थिक सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।