उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम को बताया गैर-परक्राम्य

उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम को बताया गैर-परक्राम्य

उत्तर कोरिया ने 7 जून 2026 को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को “पूरी तरह गैर-परक्राम्य” और “अपरिवर्तनीय” बताते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि वह अपने परमाणु शस्त्रागार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यह बयान देश के सर्वोच्च नेता Kim Jong Un की बहन और वरिष्ठ राजनीतिक नेता Kim Yo Jong द्वारा जारी किया गया। इस घोषणा ने एक बार फिर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

उत्तर कोरिया की परमाणु नीति

North Korea लंबे समय से अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का महत्वपूर्ण आधार मानता रहा है। वर्ष 2023 में देश ने अपने संविधान में औपचारिक रूप से परमाणु शक्ति की स्थिति को शामिल कर दिया था। यह संवैधानिक व्यवस्था परमाणु हथियारों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को भी मान्यता देती है। हालांकि, इन गतिविधियों के कारण उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। उत्तर कोरिया का दावा है कि उसका परमाणु शस्त्रागार किसी भी संभावित बाहरी आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोधक शक्ति के रूप में कार्य करता है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार देश के पास दर्जनों परमाणु वारहेड होने का अनुमान लगाया जाता है।

किम यो जोंग की भूमिका

किम यो जोंग उत्तर कोरिया की राजनीतिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं और अक्सर सरकार की ओर से महत्वपूर्ण बयान जारी करती हैं। उनके वक्तव्य आमतौर पर सरकारी समाचार एजेंसी Korean Central News Agency तथा सत्तारूढ़ दल के आधिकारिक समाचार पत्र Rodong Sinmun के माध्यम से प्रकाशित किए जाते हैं। उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि मई 2026 में बीजिंग में हुई बैठक के दौरान परमाणु निरस्त्रीकरण पर चर्चा हुई थी। उनके अनुसार ऐसी खबरें गलत और भ्रामक हैं।

चीन और रूस के साथ संबंध

उत्तर कोरिया और चीन के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देश 1961 की चीन-उत्तर कोरिया मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि के तहत सहयोगी हैं। चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping की 8 जून 2026 से प्योंगयांग यात्रा निर्धारित थी, जो सात वर्षों में उनकी पहली उत्तर कोरिया यात्रा मानी जा रही है। यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी गई। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026 में उत्तर कोरिया के नए यूरेनियम संवर्धन संयंत्र और रूस के साथ जारी सैन्य सहयोग से संबंधित रिपोर्टें भी सामने आईं। इससे संकेत मिलता है कि देश अपने सामरिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय है।

परमाणु कार्यक्रम का अंतरराष्ट्रीय महत्व

उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय संबंधों, हथियार नियंत्रण और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े प्रमुख विषयों में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2006 में उत्तर कोरिया के पहले परमाणु परीक्षण के बाद से उस पर कई चरणों में प्रतिबंध लगाए हैं। फिर भी उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बताता रहा है और हाल के वर्षों में उसने अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने की नीति को और मजबूत किया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उत्तर कोरिया ने अपना पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 2006 में किया था।
  • कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी उत्तर कोरिया की आधिकारिक सरकारी समाचार एजेंसी है।
  • रोडोंग सिनमुन वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया का आधिकारिक समाचार पत्र है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2006 से उत्तर कोरिया पर कई प्रतिबंध लगाए हैं।

उत्तर कोरिया का यह ताजा बयान दर्शाता है कि देश अपनी परमाणु नीति में किसी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। इसके परिणामस्वरूप पूर्वी एशिया की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़े प्रयासों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

Originally written on June 8, 2026 and last modified on June 8, 2026.

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