इटली की गुफा में मिले 14,000 वर्ष पुराने मानव पदचिह्नों ने खोले प्रागैतिहासिक जीवन के रहस्य
उत्तरी इटली के तोइरानो क्षेत्र स्थित ग्रोट्टा डेला बासूरा गुफा में लगभग 14,000 से 14,400 वर्ष पुराने मानव पैरों और हाथों के निशानों की पहचान की गई है। इन निशानों ने प्रागैतिहासिक मानव जीवन, उनके व्यवहार और गुफाओं के अन्वेषण के तरीकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये निशान पांच व्यक्तियों के एक समूह द्वारा छोड़े गए थे, जिनमें दो वयस्क, लगभग 11 वर्ष का एक किशोर तथा तीन और छह वर्ष आयु के दो बच्चे शामिल थे।
ग्रोट्टा डेला बासूरा गुफा का महत्व
ग्रोट्टा डेला बासूरा इटली के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र लिगुरिया में स्थित एक प्रसिद्ध गुफा है। शोधकर्ताओं के अनुसार ये पदचिह्न लेट अपर पाषाण काल के एपिग्रावेटियन शिकारी-संग्रहकर्ता समुदाय से संबंधित हैं। माना जाता है कि यह समूह एक ही अवसर पर गुफा के भीतर प्रवेश कर अन्वेषण कर रहा था। उस समय गुफा की मिट्टी में मौजूद चिकनी सतह पर उनके पैरों और हाथों के निशान सुरक्षित रह गए, जो हजारों वर्षों बाद भी संरक्षित पाए गए।
मानव गतिविधियों के दुर्लभ प्रमाण
गुफा में लगभग 180 पदचिह्न और हस्तचिह्न दर्ज किए गए हैं। इन निशानों का विश्लेषण करने पर पता चला कि समूह ने गुफा के संकरे और नीची छत वाले हिस्सों से गुजरने के लिए रेंगने का सहारा लिया था। विशेषज्ञों के अनुसार यह मानव रेंगने की गतिविधि का पहला ज्ञात जीवाश्म पदचिह्न प्रमाण है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि प्रागैतिहासिक मानव कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कैसे आगे बढ़ते थे और नए क्षेत्रों का अन्वेषण करते थे।
प्रागैतिहासिक प्रकाश व्यवस्था का अनोखा उदाहरण
अध्ययन में यह भी पता चला कि समूह ने गुफा के भीतर प्रकाश के लिए विशेष रूप से सुखाई गई स्कॉट्स पाइन की टहनियों से बने मशालों का उपयोग किया था। शोधकर्ताओं द्वारा किए गए पुनर्निर्माण से ज्ञात हुआ कि जलती हुई दो पाइन टहनियां पांच लोगों के समूह को गुफा में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त प्रकाश प्रदान कर सकती थीं। इन मशालों की रोशनी लगभग 10 मीटर तक दृश्यता उपलब्ध कराती थी, जिससे समूह को गुफा के अंदर मार्ग पहचानने में सहायता मिलती थी।
आधुनिक तकनीकों से हुआ अध्ययन
इस महत्वपूर्ण शोध में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया गया। अध्ययन के दौरान 3डी मॉडलिंग, लेजर स्कैनिंग, तलछट विश्लेषण, भू-रसायन विज्ञान और पुरावनस्पति विज्ञान जैसी विधियों को अपनाया गया। यह शोध मई 2019 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। अध्ययन में इटली, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और विटवाटरस्रैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भाग लिया। इन तकनीकों की मदद से पदचिह्नों की आयु, संरचना और मानव गतिविधियों का विस्तृत विश्लेषण संभव हो पाया।
पशु अवशेषों से मिले अतिरिक्त संकेत
गुफा में मिले साक्ष्यों से यह भी संकेत मिलता है कि समूह के साथ एक कैनिड अर्थात कुत्ते जैसे प्राणी की उपस्थिति हो सकती है। इसके अलावा गुफा में बड़ी संख्या में गुफा भालुओं के अवशेष भी पाए गए हैं। ये अवशेष दर्शाते हैं कि प्लाइस्टोसीन काल में यह गुफा विभिन्न पशु प्रजातियों के निवास और गतिविधियों का केंद्र रही होगी। इससे उस समय के पर्यावरण और जैव विविधता के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” एपिग्रावेटियन संस्कृति यूरोप के लेट अपर पाषाण काल से संबंधित मानी जाती है। ” स्कॉट्स पाइन का वैज्ञानिक नाम पिनस सिल्वेस्ट्रिस है। ” पुरातात्विक पदचिह्नों के अध्ययन में 3डी मॉडलिंग और लेजर स्कैनिंग का व्यापक उपयोग किया जाता है। ” तोइरानो इटली के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र लिगुरिया का एक महत्वपूर्ण नगर है। ग्रोट्टा डेला बासूरा में मिले 14,000 वर्ष पुराने पदचिह्न मानव इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण खोज माने जा रहे हैं। इन निशानों ने न केवल प्रागैतिहासिक मानवों की गतिविधियों और जीवनशैली की झलक दी है, बल्कि यह भी बताया है कि उस समय बच्चे और वयस्क मिलकर कठिन प्राकृतिक वातावरण में अन्वेषण किया करते थे। यह खोज मानव विकास और प्राचीन सभ्यताओं को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।