आरबीएसके 2.0 से बच्चों की समग्र स्वास्थ्य देखभाल को नई दिशा
3 मई 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नई दिल्ली में संशोधित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके 2.0) के दिशा-निर्देश जारी किए। यह कार्यक्रम जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करता है और इसमें निवारक, प्रोत्साहनात्मक तथा उपचारात्मक सेवाओं को एक ही ढांचे में शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य की समग्र निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।
आरबीएसके और 4Ds ढांचा
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2013 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत की गई थी। प्रारंभिक ढांचा “4Ds” पर आधारित था, जिसमें जन्मजात दोष, बीमारियां, पोषण संबंधी कमी और विकास में देरी शामिल थे। आरबीएसके 2.0 में इस दायरे को और विस्तारित किया गया है। अब इसमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, व्यवहार संबंधी मुद्दे तथा मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों के जोखिम कारक भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, बच्चों में मोटापा और प्रारंभिक मधुमेह जोखिम की पहचान भी इस कार्यक्रम का हिस्सा है।
स्क्रीनिंग और सेवा वितरण तंत्र
इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्क्रीनिंग की प्रक्रिया मोबाइल हेल्थ टीमों के माध्यम से जारी रहती है। ये टीमें 0-6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों और बड़े बच्चों के लिए स्कूलों में स्वास्थ्य जांच करती हैं। देशभर में 451 जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से बच्चों को मुफ्त उपचार और फॉलो-अप सेवाएं प्रदान की जाती हैं। यह प्रणाली सामुदायिक और स्कूल स्तर पर सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करती है।
आरबीएसके 2.0 में डिजिटल सुविधाएं
संशोधित दिशा-निर्देशों में डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और एकीकृत प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। ये तकनीकी उपकरण बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इसके माध्यम से स्क्रीनिंग से लेकर रेफरल, उपचार और फॉलो-अप तक सभी चरणों को ट्रैक किया जा सकता है। साथ ही, पहचाने गए मामलों को हस्तक्षेप केंद्रों से जोड़कर निरंतर देखभाल सुनिश्चित की जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2013 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई थी।
- यह कार्यक्रम जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करता है।
- आरबीएसके का प्रारंभिक ढांचा “4Ds” के रूप में जाना जाता है।
- इस योजना के तहत अब तक 160 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य जांचें की जा चुकी हैं।
आरबीएसके 2.0 बच्चों के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में उभर रहा है। यह न केवल रोगों की समय पर पहचान सुनिश्चित करता है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास और बेहतर भविष्य के लिए मजबूत आधार भी तैयार करता है।