आरबीआई की नई सूची से एनबीएफसी निगरानी में सख्ती
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 अगस्त 2026 को अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की 2026-27 के लिए अद्यतन सूची जारी की। इस बार सूची में 17 संस्थाएं शामिल हैं, जबकि पिछली सूची में इनकी संख्या 15 थी। नई सूची में टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के साथ चार सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम और कई निजी क्षेत्र की वित्तीय कंपनियां भी शामिल हैं।
अपर लेयर एनबीएफसी क्या होती हैं
एनबीएफसी वे वित्तीय संस्थान हैं जो आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत पंजीकृत होते हैं, लेकिन बैंकों की तरह मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकते। आरबीआई ने इनके लिए स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू किया है, जिसके तहत कंपनियों को बेस लेयर, मिडिल लेयर, अपर लेयर और टॉप लेयर में बांटा जाता है। यह वर्गीकरण आकार, जोखिम और प्रणालीगत महत्व के आधार पर किया जाता है।
अपर लेयर में आने वाली कंपनियों पर निगरानी अपेक्षाकृत सख्त होती है, क्योंकि इन्हें वित्तीय प्रणाली के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण इनके लिए पूंजी, अनुपालन और प्रकटीकरण से जुड़े नियम भी अधिक कड़े होते हैं।
इस बार किन कंपनियों को जगह मिली
आरबीआई ने जून 2026 में अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान के लिए नया मानदंड लागू किया था, जिसके तहत ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक की परिसंपत्ति वाली संस्थाओं को इस श्रेणी में रखा जाएगा। इसी संशोधित नियम के आधार पर 2026-27 की सूची तैयार की गई है।
नई सूची में पहली बार REC Limited, Power Finance Corporation, Indian Railway Finance Corporation और Housing and Urban Development Corporation को शामिल किया गया है। वहीं PNB Housing Finance Ltd. और Sammaan Capital Ltd. को सूची से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि वे संशोधित परिसंपत्ति मानदंड को पूरा नहीं कर पाईं।
नियमन, सूचीबद्धता और टाटा संस से जुड़ा पहलू
आरबीआई के नियमों के अनुसार, अपर लेयर में आने वाली निजी क्षेत्र की एनबीएफसी को पहचान के तीन वर्ष के भीतर अपने शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने होते हैं, हालांकि यह आरबीआई के नियमों और लागू शर्तों के अधीन होता है।
टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड को लेकर एक अलग नियामकीय प्रक्रिया भी चल रही है। कंपनी ने अगस्त 2024 में अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी पंजीकरण वापस लेने के लिए आवेदन किया था, और यह आवेदन अभी जांच के अधीन है। कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियां वे एनबीएफसी होती हैं जो समूह कंपनियों में हिस्सेदारी रखती हैं और आरबीआई के तय परिसंपत्ति व निवेश मानदंडों को पूरा करती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एनबीएफसी आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत पंजीकृत होती हैं, लेकिन बैंक की तरह मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं।
- आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए बेस, मिडिल, अपर और टॉप लेयर वाला स्केल-बेस्ड फ्रेमवर्क लागू किया है।
- अपर लेयर की पहचान के लिए अब ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक की परिसंपत्ति का मानदंड अपनाया गया है।
- अपर लेयर में आने वाली निजी क्षेत्र की एनबीएफसी पर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की अतिरिक्त शर्त लागू हो सकती है।
नई सूची से साफ है कि आरबीआई बड़ी और प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण वित्तीय कंपनियों पर निगरानी और कड़ी करना चाहता है। इससे वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और जोखिम को समय रहते नियंत्रित करने में मदद मिलती है।