आईसीसी ने श्रीलंका से महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छीनी
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने श्रीलंका से पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छीन ली है। यह छह टीमों का टूर्नामेंट 14 से 28 फरवरी 2027 के बीच खेला जाना है, लेकिन अब तक नए मेजबान का फैसला नहीं हुआ है। इस बदलाव ने श्रीलंका क्रिकेट की प्रशासनिक स्थिति और आईसीसी की मेजबानी नीति को फिर चर्चा में ला दिया है।
मेजबानी क्यों बदली गई
आईसीसी ने 30 अगस्त 2026 को श्रीलंका क्रिकेट के मेजबानी अधिकार वापस ले लिए। उस समय श्रीलंका क्रिकेट का संचालन निर्वाचित बोर्ड की जगह सरकार द्वारा नियुक्त ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी कर रही थी। इसी प्रशासनिक स्थिति को लेकर आईसीसी ने कड़ा रुख अपनाया। श्रीलंका क्रिकेट की ओर से ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सचिव प्रकाश शाफ्टर ने टूर्नामेंट के स्थानांतरण की पुष्टि की।
अब किस देश को मिल सकती है मेजबानी
रिपोर्टों के अनुसार भारत इस टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए सबसे आगे माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। आईसीसी बोर्ड की अक्टूबर 2026 में होने वाली बैठक में नए मेजबान पर मुहर लगने की उम्मीद है। आईसीसी बोर्ड ही टूर्नामेंट की मेजबानी और सदस्य देशों से जुड़े बड़े फैसले लेता है।
श्रीलंका क्रिकेट पर असर और पिछली घटना
यह पहली बार नहीं है जब प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण श्रीलंका से कोई बड़ा आयोजन छीना गया हो। इससे पहले 2024 का पुरुष अंडर-19 विश्व कप भी श्रीलंका से हटाकर दक्षिण अफ्रीका में कराया गया था। लगातार दो बड़े आयोजनों का स्थानांतरण श्रीलंका क्रिकेट की छवि और उसके प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईसीसी की स्थापना 1909 में हुई थी और यह विश्व क्रिकेट की शीर्ष संस्था है।
- महिला चैंपियंस ट्रॉफी आईसीसी का छह टीमों वाला महिला क्रिकेट टूर्नामेंट है।
- श्रीलंका क्रिकेट, श्रीलंका में क्रिकेट का राष्ट्रीय शासी निकाय है।
- आईसीसी बोर्ड मेजबानी, सदस्यता और बड़े प्रशासनिक मामलों पर अंतिम निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई है।
इस फैसले से साफ है कि आईसीसी अब मेजबानी के मामले में प्रशासनिक स्थिरता और लोकतांत्रिक बोर्ड व्यवस्था को बहुत महत्व दे रही है। महिला चैंपियंस ट्रॉफी का नया स्थल तय होना अभी बाकी है, लेकिन यह मामला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन की सख्ती को जरूर रेखांकित करता है।