आईसीएमआर ने रोग निगरानी के लिए प्राथमिक रोगजनक सूची जारी की
भारत में संक्रामक रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण को मजबूत करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 17 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण पहल के तहत प्राथमिक रोगजनक (पैथोजन) सूची जारी की। यह सूची देश में सिंड्रोमिक सर्विलांस, निदान मानकीकरण और प्रकोप की प्रारंभिक पहचान को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
सिंड्रोमिक सर्विलांस क्या है
सिंड्रोमिक सर्विलांस एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पद्धति है, जिसमें प्रयोगशाला पुष्टि से पहले लक्षणों के आधार पर रोगों की निगरानी की जाती है। इसमें बुखार, श्वसन संक्रमण, दस्त और एन्सेफलाइटिस जैसे लक्षणों के पैटर्न को ट्रैक किया जाता है। यह प्रणाली महामारी-प्रवण क्षेत्रों में असामान्य बीमारियों के समूह की पहचान करने और त्वरित स्वास्थ्य कार्रवाई करने में सहायक होती है।
प्राथमिक रोगजनक सूची की विशेषताएं
आईसीएमआर द्वारा तैयार की गई इस सूची को 44 विशेषज्ञ बैठकों के माध्यम से विकसित किया गया, जिसमें चिकित्सकों, प्रयोगशाला विशेषज्ञों और महामारी विज्ञानियों ने योगदान दिया। इस सूची में तीव्र ज्वर, एन्सेफलाइटिस, श्वसन संक्रमण और दस्त संबंधी रोगों के लिए रोगजनकों को शामिल किया गया है। इन्हें चार स्तरों (टियर) में वर्गीकृत किया गया है, जो उनके प्रसार, प्रकोप की संभावना, राष्ट्रीय उन्मूलन लक्ष्यों और निदान सुविधाओं पर आधारित हैं। यह वर्गीकरण उपचार, जांच और सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों को दिशा प्रदान करता है।
एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP)
इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित एक डिजिटल निगरानी प्रणाली है। इसे 14 अप्रैल 2021 तक पूरे देश में लागू किया गया था। यह प्लेटफॉर्म देशभर के सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों से लगभग वास्तविक समय (near real-time) में स्वास्थ्य डेटा एकत्र करता है। IHIP 30 से अधिक बीमारियों की निगरानी करता है और अस्पतालों, प्रयोगशालाओं तथा शोध संस्थानों से डेटा को एकीकृत करता है।
मल्टीप्लेक्स परीक्षण और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस
आईसीएमआर ने 20 जनवरी 2026 को एक नई मल्टीप्लेक्स परीक्षण तकनीक की योजना की घोषणा की, जिसके माध्यम से एक ही नमूने से कई रोगजनकों की पहचान की जा सकेगी। यह तकनीक तेज और सटीक निदान में सहायक है, जिससे एंटीबायोटिक के गलत उपयोग को कम किया जा सकता है। असंगत परीक्षण प्रक्रियाएं और छूटे हुए संक्रमण एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की समस्या को बढ़ाते हैं, जिसे यह पहल कम करने में मदद करेगी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य में महत्व
आईसीएमआर की यह पहल भारत की रोग निगरानी प्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल रोगों की शीघ्र पहचान संभव होगी, बल्कि महामारी के प्रसार को रोकने में भी सहायता मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईसीएमआर भारत का प्रमुख चिकित्सा अनुसंधान निकाय है, जो स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
- आईडीएसपी भारत का राष्ट्रीय रोग निगरानी कार्यक्रम है।
- IHIP को अप्रैल 2021 तक पूरे देश में लागू किया गया था।
- मल्टीप्लेक्स परीक्षण एक ही नमूने से कई रोगजनकों की पहचान कर सकता है।
यह पहल भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।