आंध्र प्रदेश में गोदावरी का उफान, बाढ़ का खतरा बढ़ा
आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी का जलस्तर 1 अगस्त 2026 को ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद तेजी से बढ़ गया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संकेत दिया कि डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में स्थित दौलेश्वरम कॉटन बैराज पर उसी दिन दूसरे चेतावनी स्तर की स्थिति बन सकती है। नदी के बढ़ते प्रवाह ने पूर्वी और मध्य आंध्र के कई इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।
दौलेश्वरम और भद्राचलम पर नजर
गोदावरी में बाढ़ की निगरानी आमतौर पर भद्राचलम और दौलेश्वरम जैसे प्रमुख बिंदुओं पर दर्ज जलप्रवाह के आधार पर की जाती है। दौलेश्वरम कॉटन बैराज पर पहला चेतावनी स्तर 10 लाख क्यूसेक और दूसरा चेतावनी स्तर 13 लाख क्यूसेक माना जाता है। 31 जुलाई 2026 को यहां जलप्रवाह 5.3 लाख क्यूसेक से अधिक था, जो देर शाम बढ़कर 8.3 लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंच गया।भद्राचलम में 31 जुलाई की शाम 7 बजे जलस्तर 49.8 फीट दर्ज किया गया। यहां नदी ने दोपहर 3:48 बजे 48 फीट का दूसरा बाढ़ चेतावनी स्तर पार कर लिया था। इससे भद्राचलम डिवीजन के 49 गांव प्रभावित हुए।
कई जिलों में अलर्ट, निचले इलाकों को खाली करने की सलाह
एपीएसडीएमए के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, कोनसीमा, काकीनाडा, एलुरु और पोलावरम के जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए। निचले और लंका गांवों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।मुलुगु जिले में रामन्नागुडेम पर गोदावरी का जलस्तर 31 जुलाई को दोपहर 2 बजे 75.47 फीट तक पहुंच गया, जो तीसरे चेतावनी स्तर 75.82 फीट के करीब था। बढ़ते पानी के कारण जिले के 35 गांवों का संपर्क टूट गया।
राहत और बचाव के लिए टीमें तैनात
आपदा की स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तीन और राज्य आपदा मोचन बल की तीन टीमों को अमलापुरम, राजमहेंद्रवरम, चिंतूर, वीआर पुरम और जंगारेड्डीगुडेम में तैनात किया गया है। इससे जरूरत पड़ने पर त्वरित बचाव, निकासी और राहत कार्य किए जा सकेंगे।तुपाकुलागुडेम स्थित समक्का-सारक्का बैराज पर भी 31 जुलाई को लगभग 14.03 लाख क्यूसेक पानी पहुंचा और उतनी ही मात्रा नीचे की ओर छोड़ी गई। यह स्थिति बताती है कि गोदावरी के निचले हिस्सों में दबाव लगातार बना हुआ है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- दौलेश्वरम कॉटन बैराज गोदावरी नदी पर आंध्र प्रदेश का एक प्रमुख नियंत्रण ढांचा है।
- क्यूसेक का अर्थ क्यूबिक फीट प्रति सेकंड होता है और यह नदी के जलप्रवाह को मापने की इकाई है।
- भद्राचलम गोदावरी पर बाढ़ निगरानी का एक महत्वपूर्ण बिंदु माना जाता है।
- एनडीआरएफ और एसडीआरएफ भारत में बाढ़, चक्रवात और अन्य आपदाओं के दौरान राहत-बचाव कार्यों में तैनात की जाती हैं।
गोदावरी भारत की प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियों में से एक है और इसका बेसिन महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक फैला है। इसके निचले हिस्से हर साल बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा देती है।