असम में बाढ़ पीड़ितों को डीबीटी से मिली त्वरित राहत
असम सरकार ने हालिया बाढ़ से प्रभावित परिवारों को करीब 160 करोड़ रुपये की अंतरिम राहत जारी की है। 3 अगस्त 2026 को यह सहायता सीधे बैंक खातों में भेजी गई, जिससे सिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के हजारों प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहारा मिला।
सीधे खाते में पहुंची राहत राशि
राज्य सरकार ने राहत वितरण के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी प्रणाली का इस्तेमाल किया। इस व्यवस्था के तहत लगभग 75,000 सबसे अधिक प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये प्रति परिवार दिए गए। शुरुआती चरण में 60,000 से अधिक परिवारों को सहायता मिल चुकी थी और आगे के आकलन के बाद लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है।डीबीटी के जरिए राहत भेजने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहायता बिना देरी और बिना बिचौलियों के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे। बाढ़ जैसी आपदा में यह तरीका प्रशासन को तेज और पारदर्शी वितरण में मदद करता है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए व्यापक राहत पैकेज
असम ने 28 जुलाई 2026 को बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए एक व्यापक राहत पैकेज की घोषणा की थी। इसके तहत बाढ़ में जान गंवाने वाले परिवारों को 9 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जिसमें 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से और 4 लाख रुपये केंद्र सरकार की ओर से मिलेंगे।राज्य सरकार ने बाढ़ से जुड़ी मृत्यु के दावों के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता भी हटा दी है। इसके अलावा, सिवसागर और चराइदेव जिलों के उन गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को 9 अगस्त 2026 तक घर लौटने में असमर्थ रहने पर 10,000 रुपये की अतिरिक्त किस्त दी जाएगी।
शिक्षा और पुनर्वास पर भी जोर
राहत पैकेज में विद्यार्थियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। गंभीर रूप से प्रभावित जिलों के छात्रों को 1 अगस्त 2026 से पुस्तक अनुदान मिलेगा, जो उच्चतर माध्यमिक स्तर के लिए 1,000 रुपये से लेकर स्नातकोत्तर छात्रों के लिए 5,000 रुपये तक होगा। इसके साथ स्कूल की किताबें और यूनिफॉर्म के लिए भी सहायता दी जाएगी।3 अगस्त 2026 तक राज्य के पांच जिलों में करीब 1.35 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे और मृतकों की संख्या 85 तक पहुंच गई थी। असम में हर साल बाढ़ की चुनौती गंभीर रहती है, क्योंकि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां मानसून के दौरान भारी जलप्रवाह लेकर आती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सरकारी लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजे जाते हैं।
- मुख्यमंत्री राहत कोष का उपयोग आपदा, आपात स्थिति और मानवीय सहायता के लिए किया जाता है।
- अनुग्रह राशि या एक्स-ग्रेशिया बिना कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार किए दी जाने वाली आर्थिक सहायता होती है।
- असम भारत के सबसे बाढ़-प्रवण राज्यों में गिना जाता है, खासकर ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र के कारण।
इस राहत पैकेज से साफ है कि राज्य सरकार तत्काल नकद सहायता के साथ-साथ शिक्षा और पुनर्वास पर भी ध्यान दे रही है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए यह कदम संकट की घड़ी में त्वरित सहारा साबित हो सकता है।