असम की छात्रवृत्ति योजनाओं से लड़कियों-बालकों को नई राहत
असम सरकार ने 6 अगस्त 2026 को गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में मुख्यमंत्री निजुत मोइना और मुख्यमंत्री निजुत बाबू योजनाओं के लिए आवेदन पत्रों का वितरण शुरू किया। राज्य के 452 शैक्षणिक संस्थानों में यह प्रक्रिया एक साथ शुरू की गई और 14 अगस्त 2026 तक आवेदन स्वीकार किए गए। दोनों योजनाएं छात्रों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने और सामाजिक समस्याओं से निपटने के उद्देश्य से जुड़ी हैं।
निजुत मोइना योजना: छात्राओं के लिए मासिक सहायता
मुख्यमंत्री निजुत मोइना योजना असम की छात्राओं के लिए एक कल्याणकारी योजना है। इसके तहत उच्चतर माध्यमिक और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये प्रतिमाह, स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए 1,250 रुपये प्रतिमाह और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए 2,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम से भी जुड़ा है।
राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के तहत 1 लाख नए लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इससे कुल लाभार्थियों की संख्या 5 लाख तक पहुंचाने की योजना है। यह पहल उन परिवारों के लिए खास तौर पर उपयोगी मानी जा रही है, जिनके लिए उच्च शिक्षा का खर्च एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
निजुत बाबू योजना: छात्रों की पढ़ाई में बने रहने की कोशिश
मुख्यमंत्री निजुत बाबू योजना असम के छात्र-लाभार्थियों के लिए शुरू की गई वित्तीय सहायता योजना है। इसके तहत पात्र स्नातक छात्रों को 1,000 रुपये प्रतिमाह और पात्र स्नातकोत्तर छात्रों को 2,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य विशेष रूप से लड़कों में पढ़ाई छोड़ने की प्रवृत्ति को कम करना है।
सरकार ने इस योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 70,000 नए लड़कों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है, जिससे कुल लाभार्थियों की संख्या 1.20 लाख तक पहुंचाई जाएगी। शिक्षा के साथ आर्थिक सहायता जोड़ने की यह नीति राज्य में छात्र-धारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
बाढ़ प्रभावित स्कूलों और छात्रों को भी राहत
इसी अवसर पर असम सरकार ने बाढ़ से प्रभावित स्कूलों और छात्रों के लिए भी सहायता जारी की। सिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के 793 बाढ़ प्रभावित स्कूलों को सीधे लाभ अंतरण के माध्यम से 15.86 करोड़ रुपये भेजे गए।
इसके अलावा, सिवसागर और चराइदेव के 21,025 छात्रों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 4.26 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की गई, ताकि वे बाढ़ में खोई हुई अध्ययन सामग्री खरीद सकें। छात्र सहायता और आपदा राहत को एक साथ जोड़ना राज्य की शिक्षा-नीति और आपदा-प्रबंधन दोनों प्राथमिकताओं को दिखाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र गुवाहाटी, असम का एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान है।
- डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के तहत सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
- मुख्यमंत्री राहत कोष का उपयोग राज्य सरकारें आपात सहायता और आपदा-सम्बंधी राहत के लिए करती हैं।
- बाल विवाह रोकने के लिए कई राज्यों में शिक्षा और आर्थिक सहायता आधारित योजनाएं चलाई जाती हैं।
इन दोनों योजनाओं के जरिए असम सरकार ने छात्राओं और छात्रों, दोनों के लिए अलग-अलग जरूरतों को संबोधित करने की कोशिश की है। साथ ही, बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए राहत पैकेज ने इस पहल को और व्यापक बना दिया है।