अरुणाचल प्रदेश में 158 वर्ष बाद फिर मिली दुर्लभ पुष्पीय प्रजाति सायनैंथस हूकेरी

अरुणाचल प्रदेश में 158 वर्ष बाद फिर मिली दुर्लभ पुष्पीय प्रजाति सायनैंथस हूकेरी

पूर्वी हिमालय की दुर्लभ बैंगनी-नीले रंग की अल्पाइन पुष्पीय प्रजाति सायनैंथस हूकेरी (Cyananthus hookeri) को 158 वर्षों बाद अरुणाचल प्रदेश में दोबारा खोजा गया है। यह भारत में इस प्रजाति का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड है, जो वर्ष 1867 के बाद सामने आया है। इस दुर्लभ पौधे की खोज अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के मागो गांव के निकट चुना घाटी में लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर की गई। यह खोज भारत की वनस्पति विविधता और संरक्षण प्रयासों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सायनैंथस हूकेरी की विशेषताएं

सायनैंथस हूकेरी कैंपानुलेसी (Campanulaceae) अर्थात बेलफ्लावर परिवार का एक दुर्लभ पुष्पीय अल्पाइन पौधा है। यह नाजुक शाकीय पौधा पूर्वी हिमालय के अत्यधिक ऊंचाई वाले ठंडे और पथरीले क्षेत्रों में उगने के लिए अनुकूलित है। इसकी आकर्षक बैंगनी-नीले रंग की घंटी के आकार की पुष्प संरचना इसे अन्य अल्पाइन प्रजातियों से अलग पहचान देती है। भारत में इस पौधे का अंतिम प्रलेखित रिकॉर्ड वर्ष 1867 में प्रसिद्ध ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री सर जोसेफ डाल्टन हूकर द्वारा सिक्किम में दर्ज किया गया था।

अरुणाचल प्रदेश में पुनः खोज

इस दुर्लभ पौधे की पुनः खोज सितंबर 2025 में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India) की एक वैज्ञानिक टीम द्वारा किए गए फील्ड सर्वेक्षण के दौरान हुई। इस टीम में डॉ. सुधांशु शेखर दास, डॉ. सुभजीत लाहिड़ी और मोनालिसा दास शामिल थे। यह खोज तवांग जिले की चुना घाटी में हुई, जो पूर्वी हिमालय के समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और विशिष्ट जलवायु अनेक दुर्लभ एवं स्थानिक पौधों का प्राकृतिक आवास हैं।

संरक्षण की स्थिति

वैज्ञानिकों ने सर्वेक्षण के दौरान इस प्रजाति के 50 से भी कम परिपक्व पौधों का अस्तित्व दर्ज किया। कुछ स्थानों पर केवल 3 से 7 परिपक्व पौधे ही पाए गए। इतनी कम संख्या को देखते हुए शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति को भारत में आईयूसीएन (IUCN) के मानकों के अनुसार ‘संकटग्रस्त (Endangered)’ श्रेणी में रखने की अनुशंसा की है। इस महत्वपूर्ण शोध के निष्कर्ष 30 जून 2026 को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित संरक्षण पत्रिका ओरिक्स (Oryx) में प्रकाशित किए गए।

खोज का महत्व

सायनैंथस हूकेरी की पुनः खोज भारत की वनस्पति संपदा के संरक्षण और जैव विविधता के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रकार की खोजें वनस्पति वर्गीकरण, जैव विविधता सर्वेक्षण और संरक्षण रणनीतियों को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं। पूर्वी हिमालय जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजातियों की पहचान भविष्य में संरक्षण योजनाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India) देश में पौधों की खोज, पहचान और प्रलेखन करने वाली राष्ट्रीय संस्था है।
  • कैंपानुलेसी (Campanulaceae) को सामान्यतः बेलफ्लावर परिवार कहा जाता है।
  • सर जोसेफ डाल्टन हूकर 19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री थे, जिन्होंने हिमालयी वनस्पतियों का व्यापक अध्ययन किया।
  • पूर्वी हिमालय विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक है, जहां अनेक दुर्लभ और स्थानिक पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

सायनैंथस हूकेरी की 158 वर्षों बाद हुई पुनः खोज भारत की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। यह खोज न केवल दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करती है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नई संभावनाओं के द्वार खोलती है।

Originally written on July 10, 2026 and last modified on July 10, 2026.

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