IRDAI की सख्ती: इंडसइंड बैंक पर ₹1 करोड़ का जुर्माना

IRDAI की सख्ती: इंडसइंड बैंक पर ₹1 करोड़ का जुर्माना

बीमा क्षेत्र के नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इंडसइंड बैंक पर बीमा संबंधी शिकायत निवारण और रिपोर्टिंग नियमों के उल्लंघन के लिए ₹1 करोड़ का मौद्रिक दंड लगाया है। यह कार्रवाई बैंक के बैंकास्योरेंस कारोबार में पाई गई कमियों के बाद की गई, जिसमें ग्राहकों के लिए जरूरी शिकायत व्यवस्था, नवीनीकरण सूचना और नियामकीय जानकारी का प्रदर्शन ठीक से नहीं किया गया था।

क्या पाया गया निरीक्षण में

IRDAI ने 19 जून 2023 से 22 जून 2023 के बीच इंडसइंड बैंक के बैंकास्योरेंस संचालन का ऑनसाइट निरीक्षण किया था। निरीक्षण में यह सामने आया कि बैंक ने बीमा ग्राहकों के लिए अलग और समुचित शिकायत निवारण ढांचा नहीं बनाया था और वह सामान्य बैंकिंग शिकायत तंत्र पर निर्भर रहा। इसके अलावा, पॉलिसीधारकों को नवीनीकरण सूचना भेजने की व्यवस्था भी नहीं थी।

नियामक ने यह भी पाया कि बैंक के प्लेटफॉर्म पर IRDAI पंजीकरण संख्या प्रदर्शित नहीं की गई थी और वेबसाइट पर बीमा ग्राहकों के लिए पर्याप्त शिकायत सुविधा उपलब्ध नहीं थी। बीमा वितरण से जुड़ी इन कमियों को उपभोक्ता संरक्षण और नियामकीय अनुपालन, दोनों के लिहाज से गंभीर माना गया।

नियामकीय प्रक्रिया और बैंक पर निर्देश

कार्रवाई शुरू करने से पहले IRDAI ने 26 मार्च 2025 को बैंक को शो कॉज नोटिस जारी किया था। बाद में 10 सितंबर 2026 को दंड आदेश पारित किया गया, जो बैंक को 11 सितंबर 2026 को प्राप्त हुआ। आदेश में बैंक को अपनी शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने, मामले को अपने बोर्ड के समक्ष रखने और 90 दिनों के भीतर एक एक्शन टेकन रिपोर्ट IRDAI को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि बैंक जब बीमा उत्पाद बेचते हैं, तो वे केवल वित्तीय मध्यस्थ नहीं रहते, बल्कि उपभोक्ता सेवा और नियामकीय पारदर्शिता की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। बैंकास्योरेंस मॉडल में ग्राहक को बीमा कंपनी और वितरण चैनल, दोनों से जुड़ी स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

बैंकास्योरेंस और बीमा उपभोक्ता अधिकार

बैंकास्योरेंस वह वितरण मॉडल है जिसमें बैंक अपनी शाखाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म या ग्राहक सेवा चैनलों के जरिए बीमा उत्पाद बेचते हैं। इस व्यवस्था में पॉलिसीधारक को शिकायत निवारण सुविधा, नवीनीकरण सूचना और वितरक या बीमाकर्ता की पंजीकरण जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी होता है। यही कारण है कि IRDAI ऐसे मामलों में अनुपालन को बहुत गंभीरता से देखता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • IRDAI की स्थापना Insurance Regulatory and Development Authority Act, 1999 के तहत हुई थी।
  • IRDAI भारत में बीमा क्षेत्र का वैधानिक नियामक है।
  • बैंकास्योरेंस में बैंक अपने नेटवर्क के जरिए बीमा उत्पाद बेचते हैं।
  • Show Cause Notice एक औपचारिक नियामकीय नोटिस होता है, जिसमें संबंधित संस्था से कथित उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा जाता है।

इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि बीमा वितरण में ग्राहक अधिकार, शिकायत निवारण और नियामकीय पारदर्शिता केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य अनुपालन का हिस्सा हैं।

Originally written on September 12, 2026 and last modified on September 12, 2026.

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