IFFI 2026 की तैयारी तेज, गोवा में फिर सजेगा अंतरराष्ट्रीय सिनेमा मंच
57वें अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव (IFFI) की पहली स्टियरिंग कमेटी बैठक 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई। बैठक में 20 से 28 नवंबर 2026 तक गोवा में होने वाले महोत्सव की तैयारियों, कार्यक्रम संरचना और युवा फिल्मकारों के लिए अवसरों पर चर्चा की गई।
महोत्सव की रूपरेखा और प्रशासनिक जिम्मेदारी
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने की। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार भी बैठक में शामिल हुए। IFFI के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नोडल मंत्रालय की भूमिका निभाता है, जबकि इसका आयोजन राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) के माध्यम से किया जाता है।
IFFI भारत के प्रमुख फिल्म महोत्सवों में से एक है और हर वर्ष आयोजित होता है। गोवा लंबे समय से इसका नियमित स्थल रहा है, जहां भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ-साथ फिल्म उद्योग से जुड़े संवाद भी होते हैं।
युवा फिल्मकारों और रचनात्मक उद्योग पर फोकस
बैठक में मास्टरक्लास, मेंटरशिप कार्यक्रम और उभरते फिल्मकारों तथा विद्यार्थियों के लिए संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया। यह संकेत है कि IFFI अब केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि सीखने, नेटवर्किंग और प्रतिभा को मंच देने वाला बड़ा सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है।
मंत्रालय ने महोत्सव को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था, यानी “ऑरेंज इकोनॉमी”, से भी जोड़ा है। इस संदर्भ में फिल्म, कला, मीडिया और सांस्कृतिक उद्योगों की आर्थिक और रोजगार सृजन क्षमता को रेखांकित किया जाता है।
IFFI क्यों है महत्वपूर्ण
IFFI की शुरुआत 1952 में हुई थी और इसे एशिया के सबसे पुराने फिल्म महोत्सवों में गिना जाता है। 2004 से गोवा इसका नियमित आयोजन स्थल बना हुआ है। इस महोत्सव में प्रतिस्पर्धी खंड, रेट्रोस्पेक्टिव, मास्टरक्लास और उद्योग से जुड़े सत्र शामिल रहते हैं, जिससे यह भारतीय सिनेमा के वैश्विक विस्तार का भी माध्यम बनता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IFFI की शुरुआत 1952 में हुई थी।
- गोवा 2004 से IFFI का नियमित आयोजन स्थल है।
- IFFI का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत NFDC करता है।
- फिल्म महोत्सवों में आम तौर पर स्क्रीनिंग, प्रतिस्पर्धी खंड, मास्टरक्लास और उद्योग संवाद शामिल होते हैं।
57वें IFFI की तैयारियों के साथ गोवा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा, रचनात्मक संवाद और भारतीय फिल्म उद्योग की वैश्विक उपस्थिति का केंद्र बनने जा रहा है।