G7 की तेल भंडार से राहत, वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव के बीच G7 देशों ने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई है। यह कदम 2 अक्टूबर 2026 को लिया गया और इसका समन्वय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के जरिए किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला
यह संयुक्त रिहाई ऐसे समय में की जा रही है जब तेल और ईंधन आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। G7 का मानना है कि आपात भंडार से सीमित और समन्वित आपूर्ति बाजार में स्थिरता लाने में मदद कर सकती है। इस योजना के तहत रिलीज को चार महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जबकि शुरुआती 20 दिनों में डीजल की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी।
G7 ने यह भी कहा है कि उसके सदस्य देश एक-दूसरे के बीच ऊर्जा और ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे। इससे आपूर्ति शृंखला को सुचारु रखने और बाजार में अनिश्चितता कम करने की कोशिश की जा रही है।
G7 और IEA की भूमिका
G7 दुनिया की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का अंतर-सरकारी मंच है। इसके सदस्य कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका हैं, जबकि यूरोपीय संघ इसकी बैठकों में भाग लेता है। ऊर्जा संकट या आपूर्ति बाधा की स्थिति में यह समूह अक्सर साझा नीति के जरिए प्रतिक्रिया देता है।
इस पूरी प्रक्रिया में IEA की भूमिका अहम है। 1974 के तेल संकट के बाद बनी यह एजेंसी पेरिस में स्थित है और सदस्य देशों के बीच आपातकालीन तेल भंडार के समन्वय का काम करती है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति, मांग और भंडार पर भी नजर रखती है।
आपात तेल भंडार का महत्व
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सरकारों द्वारा रखे गए कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक होते हैं। इनका इस्तेमाल युद्ध, प्रतिबंध, परिवहन बाधा या बाजार में अचानक झटके जैसी स्थितियों में किया जाता है। इससे तत्काल आपूर्ति संकट को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
ऐसे भंडार का उपयोग पहले भी कई बड़े संकटों में किया जा चुका है, जिनमें 1991 का खाड़ी युद्ध, 2005 में हरिकेन कैटरीना से हुई आपूर्ति बाधा और 2022 का रूस-यूक्रेन संघर्ष शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- G7 की शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी और 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बना।
- IEA की स्थापना 1974 के तेल संकट के बाद ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।
- डीजल को मिडिल डिस्टिलेट ईंधन माना जाता है और इसका उपयोग परिवहन, कृषि और उद्योग में व्यापक रूप से होता है।
- आपातकालीन तेल भंडार का उपयोग आम तौर पर युद्ध, प्रतिबंध, प्राकृतिक आपदा या आपूर्ति शृंखला बाधित होने पर किया जाता है।
इस फैसले से साफ है कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक नीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। आने वाले महीनों में इस संयुक्त रिहाई का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और ईंधन बाजार की दिशा पर देखा जाएगा।