कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में आर्थिक लचीलापन और समावेशी विकास पर जोर
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन संबोधन दिया। तीन दिन चलने वाला यह सम्मेलन 3 से 5 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया, जिसकी थीम थी “Resilience in an Age of Flux”। इस मंच पर आर्थिक नीतियों, वैश्विक अनिश्चितताओं और संस्थागत स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन क्या है
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन एक वार्षिक नीति मंच है, जिसका आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ और वित्त मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है। यह सम्मेलन अर्थशास्त्रियों, नीति-निर्माताओं, अकादमिक विशेषज्ञों और वैश्विक विचारकों को एक साथ लाकर आर्थिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श का अवसर देता है। 5वें संस्करण में लगभग 30 देशों से 180 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।
थीम का अर्थ और नीति बहस
इस वर्ष की थीम “Resilience in an Age of Flux” ऐसे समय में चुनी गई जब दुनिया आर्थिक झटकों, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति-श्रृंखला दबावों और नीतिगत अस्थिरताओं से जूझ रही है। उद्घाटन सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि आर्थिक नीतियां कैसे विकास को प्रभावित किए बिना, खुलेपन और संस्थागत विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए लचीलापन पैदा कर सकती हैं।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक लचीलापन सामाजिक लचीलापन से जुड़ा है और समावेशन ही लचीलापन की आधारशिला है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कोई भी नागरिक, उद्यम या क्षेत्र पीछे नहीं छूटना चाहिए और विकास को केवल जीडीपी के आधार पर नहीं आंका जा सकता।
नीति, विकास और समावेशन का संदेश
यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कई देश विकास के पारंपरिक मानकों के साथ-साथ समान अवसर, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर दे रहे हैं। सम्मेलन में वित्त, विदेश नीति, संचार और पर्यटन से जुड़े मंत्रियों की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि आर्थिक लचीलापन केवल वित्तीय नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक शासन और विकास मॉडल से जुड़ा विषय है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ और वित्त मंत्रालय के सहयोग से होता है।
- 5वां संस्करण 3 से 5 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
- 2026 सम्मेलन की थीम “Resilience in an Age of Flux” थी।
- कौटिल्य प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतक थे, जिन्हें अर्थशास्त्र ग्रंथ से जोड़ा जाता है।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन इस बात पर केंद्रित रहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और अन्य देश किस तरह समावेशी, स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक ढांचा तैयार कर सकते हैं।