2030 तक यूपी के निर्यात को 5 लाख करोड़ तक ले जाने की रणनीति
उत्तर प्रदेश ने 2030 तक अपने वार्षिक निर्यात को मौजूदा करीब 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यह घोषणा 27 सितंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दौरान की गई। यह लक्ष्य राज्य की उस बड़ी आर्थिक योजना से जुड़ा है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
निर्यात नीति 2025-30 से मिलेगी दिशा
राज्य की निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 का मकसद वित्त वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के संयुक्त निर्यात को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। नीति में बाजार तक पहुंच बढ़ाने, निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और अलग-अलग क्षेत्रों के उत्पादकों व व्यापारियों को विशेष सहायता देने पर जोर है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश ने अपनी निर्यात रणनीति को भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौता नेटवर्क से भी जोड़ा है, ताकि विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बेहतर हो सके।
औद्योगिक आधार और बुनियादी ढांचे पर जोर
निर्यात बढ़ाने के लिए राज्य ने रक्षा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स को प्राथमिक औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है। इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और औद्योगिक पार्कों का विस्तार किया गया है। यह ढांचा केवल उद्योगों की जरूरतें पूरी नहीं करता, बल्कि माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी तेज बनाता है।
उत्तर प्रदेश की रणनीति का एक अहम हिस्सा यह है कि उत्पादन केंद्रों को सीधे निर्यात गलियारों से जोड़ा जाए। इससे समय और लागत दोनों में कमी आती है, जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी है।
एमएसएमई और प्रमुख निर्यात उत्पाद
राज्य के निर्यात में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई की हिस्सेदारी लगभग 45% है। यह तथ्य बताता है कि उत्तर प्रदेश का निर्यात ढांचा बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्यमों पर भी टिका हुआ है। राज्य से इंजीनियरिंग गुड्स, हस्तशिल्प, वस्त्र और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पाद बड़े पैमाने पर निर्यात किए जाते हैं।
एमएसएमई की मजबूत मौजूदगी उत्तर प्रदेश को विविध उत्पाद आधार देती है। यही कारण है कि निर्यात वृद्धि की योजना में छोटे उत्पादकों, कारीगरों और प्रसंस्करण इकाइयों को भी अहम स्थान दिया गया है।
शराब, एथेनॉल और संबंधित उत्पादों के लिए अलग नीति
उत्तर प्रदेश ने 2026-27 से 2028-29 तक के लिए तीन वर्षीय आबकारी निर्यात नीति भी शुरू की है। इसके तहत राज्य भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसके पास मादक पेय, एथेनॉल और संबंधित उत्पादों के निर्यात के लिए समर्पित बहुवर्षीय ढांचा है। इससे राज्य के व्यापार ढांचे में एक अलग निर्यात चैनल जुड़ गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उत्तर प्रदेश ने 2030 तक वार्षिक निर्यात 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
- राज्य की निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 का लक्ष्य FY2030 तक 50 अरब डॉलर के संयुक्त वस्तु एवं सेवा निर्यात तक पहुंचना है।
- एमएसएमई की हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश के कुल निर्यात में लगभग 45% है।
- मुक्त व्यापार समझौते ऐसे व्यापारिक समझौते होते हैं, जिनमें देशों के बीच शुल्क या व्यापार बाधाएं कम की जाती हैं।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की यह योजना औद्योगिक विस्तार, लॉजिस्टिक्स सुधार और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को एक साथ जोड़ती है। यदि नीति और बुनियादी ढांचे के बीच तालमेल बना रहा, तो राज्य का निर्यात आधार आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत हो सकता है।