एनएमडीसी की नई परियोजना से छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क वैल्यू चेन मजबूत
एनएमडीसी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ में 5,427 करोड़ रुपये की एकीकृत लौह अयस्क प्रसंस्करण, स्लरी पाइपलाइन और पेलेट निर्माण परियोजना शुरू की है। 27 और 28 सितंबर 2026 को शुरू हुई इस परियोजना के तहत बैलाडीला क्षेत्र के अयस्क को अब खनन से आगे बढ़ाकर प्रसंस्करण, परिवहन और पेलेट उत्पादन की पूरी श्रृंखला में बदला जाएगा।
बचेली से नागर्नार तक नई औद्योगिक कड़ी
इस परियोजना में दंतेवाड़ा जिले के बचेली में नया लौह अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र, 15 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली स्लरी पाइपलाइन और बस्तर जिले के नागर्नार में 2 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाला पेलेट प्लांट शामिल है। 135 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन प्रसंस्कृत लौह अयस्क सांद्रण को बचेली से नागर्नार तक पहुंचाएगी।
स्लरी पाइपलाइन खनिज सांद्रण को पानी के साथ मिलाकर पाइपों के जरिए ले जाने की व्यवस्था होती है। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता घटती है और बड़े पैमाने पर खनिज ढुलाई अधिक सुगम होती है।
बैलाडीला अयस्क को अब अधिक मूल्यवर्धित रूप मिलेगा
एनएमडीसी की यह पहल लौह अयस्क के फाइन्स और स्लाइम्स को उपयोगी उत्पाद में बदलने पर केंद्रित है। खनन के दौरान निकलने वाले इन छोटे कणों को पहले सांद्रण में बदला जाएगा और फिर पेलेट के रूप में तैयार किया जाएगा।
पेलेट इस्पात निर्माण में इस्तेमाल होने वाला मानक कच्चा माल है। नागर्नार का पेलेट संयंत्र स्ट्रेट ग्रेट इंड्यूरशन तकनीक पर आधारित है, जिसमें गर्मी के जरिए लौह अयस्क के पेलेट को कठोर बनाया जाता है। इससे इस्पात उद्योग के लिए एक समान गुणवत्ता वाला फीड मटेरियल उपलब्ध होता है।
एनएमडीसी की विस्तार रणनीति और महत्व
एनएमडीसी इस परियोजना को अपनी दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता विस्तार योजना से जोड़कर देख रहा है। कंपनी का लक्ष्य लौह अयस्क उत्पादन क्षमता को 100 मिलियन टन तक ले जाना है। नई इकाइयों के साथ एनएमडीसी अब खनन के साथ-साथ प्रसंस्करण, परिवहन और पेलेट उत्पादन में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करेगा।
एनएमडीसी लिमिटेड इस्पात मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है और देश के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादकों में शामिल है। कंपनी की प्रमुख खदानें छत्तीसगढ़ के बैलाडीला क्षेत्र में हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एनएमडीसी लिमिटेड की स्थापना 1958 में हुई थी।
- बैलाडीला क्षेत्र छत्तीसगढ़ में स्थित है और भारत के प्रमुख उच्च-ग्रेड लौह अयस्क संसाधनों में गिना जाता है।
- पेलेटाइजेशन प्रक्रिया में लौह अयस्क के सूक्ष्म कणों को गोलाकार पेलेट में बदला जाता है।
- स्लरी पाइपलाइन खनिज परिवहन का ऐसा माध्यम है, जिसमें अयस्क को पानी के साथ मिलाकर पाइपलाइन से भेजा जाता है।
इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क की पूरी वैल्यू चेन को मजबूती मिलेगी और एनएमडीसी की औद्योगिक क्षमता भी बढ़ेगी। कंपनी ने इसे अपने विस्तार कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।