हेलिना मिसाइल: स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल से और मजबूत होगी भारतीय सेना की मारक क्षमता

हेलिना मिसाइल: स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल से और मजबूत होगी भारतीय सेना की मारक क्षमता

भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में हेलिना (Helina) मिसाइल एक महत्वपूर्ण स्वदेशी उपलब्धि है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित यह तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल विशेष रूप से हेलीकॉप्टर से प्रक्षेपण के लिए तैयार की गई है। हेलिना का पूरा नाम हेलीकॉप्टर-लॉन्च्ड नाग (Helicopter-launched Nag) है। यह आधुनिक मिसाइल अत्याधुनिक इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर, फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक तथा टॉप अटैक क्षमता से लैस है, जिससे यह दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकती है।

हेलिना मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ

हेलिना एक फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल प्रणाली है, अर्थात लक्ष्य को लॉक करने के बाद इसे दागने पर ऑपरेटर को लगातार मार्गदर्शन देने की आवश्यकता नहीं होती। मिसाइल अपने इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर की सहायता से लक्ष्य का स्वतः पीछा करती है और अत्यधिक सटीकता के साथ उसे भेदती है। यह मिसाइल 500 मीटर से 7 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित बख्तरबंद लक्ष्यों को निशाना बना सकती है। हेलिना में डायरेक्ट हिट और टॉप अटैक दोनों प्रकार की क्षमता उपलब्ध है। टॉप अटैक मोड में मिसाइल टैंक के ऊपरी हिस्से पर हमला करती है, जो उसकी सबसे कमजोर सुरक्षा परत मानी जाती है।

हेलीकॉप्टर से प्रक्षेपण और परीक्षण

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड से हेलिना मिसाइल के लाइव फायर परीक्षण की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा जब इस मिसाइल का परीक्षण एलसीएच प्रचंड से किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2022 में हेलिना का सफल परीक्षण एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) से किया गया था। अप्रैल 2022 में उच्च ऊंचाई वाले परीक्षण क्षेत्रों में डीआरडीओ, भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की संयुक्त टीमों ने हेलिना के उपयोगकर्ता सत्यापन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए थे।

उत्पादन और रक्षा उद्योग में महत्व

हेलिना मिसाइल के उत्पादन और एकीकरण को गति देने के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 1,109.37 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (LRUs) और काउंटरमेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम से संबंधित 238.34 करोड़ रुपये के उपकरणों की आपूर्ति भी इस अनुबंध में शामिल है। इस परियोजना का कार्यान्वयन 24 से 60 महीनों के भीतर किया जाएगा। हेलिना के एकीकरण से भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के एलसीएच प्रचंड की एंटी-आर्मर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत की रक्षा क्षमता को मिलेगा नया बल

हेलिना मिसाइल भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है और दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध तेज, सटीक और प्रभावी हमला करने में सक्षम है। इसका सफल एकीकरण भारतीय सशस्त्र बलों की आक्रामक क्षमता को मजबूत करेगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हेलिना (Helina) का पूरा नाम हेलीकॉप्टर-लॉन्च्ड नाग है।
  • यह डीआरडीओ द्वारा विकसित तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है।
  • हेलिना इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर और फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक का उपयोग करती है।
  • यह मिसाइल 500 मीटर से 7 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित बख्तरबंद लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

हेलिना मिसाइल भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसकी उन्नत तकनीक, सटीक मारक क्षमता और हेलीकॉप्टर आधारित संचालन भारतीय सेना और वायुसेना की युद्धक क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेंगे। भविष्य में इसके व्यापक उपयोग से भारत की रक्षा तैयारियों और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को और अधिक बल मिलने की उम्मीद है।

Originally written on June 27, 2026 and last modified on June 27, 2026.

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