हिंद-प्रशांत में समुद्री सहयोग पर मंथन करेगा भारत
भारतीय नौसेना 3 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) की मेजबानी करेगी। इस वर्ष संवाद का विषय ‘हिंद-प्रशांत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग’ है। 23 अक्टूबर 2026 तक इसमें भागीदारी के लिए पंजीकरण खुला है।
समुद्री रणनीति पर उच्चस्तरीय संवाद
आईपीआरडी भारतीय नौसेना का प्रमुख रणनीतिक समुद्री संवाद और उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। इसमें समुद्री मामलों के विचारक, नीति-निर्माता, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल होते हैं। 2026 के आयोजन का उद्देश्य हिंद-प्रशांत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग के रास्ते तलाशना है। आयोजन में समुद्री शोध, नीति-संवाद और रणनीतिक विचार से जुड़ी भारतीय संस्था राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन भी शामिल है।
विज्ञान और समुद्री प्रौद्योगिकी पर जोर
कार्यक्रम के पाँच विषयों में महासागर विज्ञान और जलवायु सहनशीलता प्रमुख हैं। महासागर विज्ञान में समुद्र के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों का अध्ययन किया जाता है। जलवायु सहनशीलता का आशय जलवायु से जुड़े जोखिमों के लिए तैयारी करने और उनके प्रभावों से उबरने की क्षमता से है। संवाद में समुद्री क्षेत्र की ऐसी प्रौद्योगिकियों पर भी चर्चा होगी जिनका नागरिक और सैन्य, दोनों तरह से उपयोग हो सकता है। ऐसी तकनीकों को दोहरे उपयोग वाली तकनीक कहा जाता है।
महासागर शासन से लेकर शोध नेटवर्क तक
अन्य प्राथमिकताओं में महासागर शासन और समुद्री सहनशीलता के लिए सहयोगी तरीके, समुद्री क्षेत्र की गतिविधियों पर निगरानी तथा महत्त्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा शामिल हैं। महासागर शासन में समुद्री गतिविधियों और संसाधनों के प्रबंधन की व्यवस्थाएँ आती हैं। समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई और उसका विश्लेषण किया जाता है। महत्त्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढाँचे में वे सुविधाएँ और प्रणालियाँ शामिल हैं जो समुद्री गतिविधियों के लिए आवश्यक हैं। शैक्षणिक सहयोग के तहत शोध नेटवर्क और कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान रहेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय नौसेना भारतीय सशस्त्र बलों की समुद्री शाखा है।
- आईपीआरडी 2026 का आयोजन 3 से 5 नवंबर तक नई दिल्ली में होगा।
- राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन इस संवाद के आयोजन में सहभागी है।
- दोहरे उपयोग वाली तकनीकों का नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकता है।
आईपीआरडी 2026 समुद्री विज्ञान, तकनीकी नवाचार और शैक्षणिक साझेदारी को एक साथ लाकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा समुद्री चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने का मंच बनेगा।