सीओपी31 में जलवायु वित्त के वादों पर होगी कसौटी

सीओपी31 में जलवायु वित्त के वादों पर होगी कसौटी

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का 31वां सत्र (सीओपी31) 9 से 20 नवंबर 2026 तक तुर्किये के अंताल्या में आयोजित होगा। सम्मेलन के केंद्र में जलवायु वित्त रहेगा—यानी जलवायु परिवर्तन को कम करने और उसके प्रभावों के अनुकूल होने के लिए जरूरी धन। विकसित देशों से तय वित्तीय लक्ष्य पूरा करने और विकासशील देशों तक धन की पहुंच सुनिश्चित करने की अपेक्षा है।

वित्तीय लक्ष्य और भरोसेमंद धन की जरूरत

सीओपी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) का निर्णय लेने वाला निकाय है। यह अभिसमय 1992 में अपनाया गया था। इसके सदस्य देश सम्मेलन में समझौते के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हैं और जलवायु कार्रवाई से जुड़े फैसलों पर बातचीत करते हैं। सीओपी31 की मेजबानी तुर्किये करेगा और ऑस्ट्रेलिया भी इसकी अध्यक्षताओं से जुड़ा है।

सीओपी29 में देशों ने 2035 तक विकासशील देशों के लिए हर साल कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर के जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमति जताई थी। इसके साथ ही, उसी वर्ष तक सालाना कम से कम 1.3 लाख करोड़ डॉलर जुटाने की व्यापक महत्वाकांक्षा भी सामने रखी गई। अब चुनौती इन लक्ष्यों को ऐसे भरोसेमंद और अनुमानित वित्तीय इंतजामों में बदलने की है, जिनसे जरूरतमंद देशों को समय पर सहायता मिल सके।

वित्त तक पहुंच और अनुदान पर जोर

विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने विकसित देशों से कई वर्षों की वित्तीय योजनाएं देने की मांग की है। इन योजनाओं में योगदान, धन के आवंटन और सहायता हासिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। संगठन ने कहा है कि ऐसी योजनाएं 25 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तुत की जाएं और वित्तपोषण के लिए अनुदान को प्राथमिकता दी जाए।

ग्रीनपीस ने 2025 के बाद की अवधि के लिए महत्वाकांक्षी, बहुवर्षीय प्रतिबद्धताओं की मांग की है। उसके अनुसार विकसित देशों की घोषणाएं 300 अरब डॉलर के लक्ष्य में उनके उचित हिस्से के अनुरूप होनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के जलवायु मंत्री क्रिस बोवेन ने 25 अक्टूबर 2026 को कहा कि छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को वैश्विक जलवायु वित्त का केवल 0.2 प्रतिशत मिलता है, जबकि वे जलवायु प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। सीओपी31 के नामित अध्यक्ष मूरत कुरुम ने भी कहा कि नाटो देशों को जलवायु प्रयासों में सैन्य रक्षा से कहीं अधिक निवेश करना चाहिए।

ऊर्जा और कचरे को लेकर 2035 की महत्वाकांक्षाएं

सीओपी31 की अध्यक्षताओं ने 2035 के लिए कुछ क्षेत्रीय लक्ष्य भी सामने रखे हैं। इनमें अंतिम ऊर्जा मांग में बिजली की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक बढ़ाना, वैश्विक कचरे की वृद्धि आधी करना और भवन क्षेत्र की ऊर्जा तीव्रता में 25 प्रतिशत कमी लाना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की वित्त पहल (यूएनईपी एफआई) सम्मेलन में नीति-निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के साथ जलवायु कार्रवाई के लिए निवेश तथा वित्त पर चर्चा करेगी। इसका जोर मजबूत और कम-कार्बन भविष्य के लिए पूंजी जुटाने पर होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूएनएफसीसीसी को 1992 में अपनाया गया था।
  • सीओपी29 में 2035 तक विकासशील देशों के लिए सालाना कम से कम 300 अरब डॉलर के जलवायु वित्त लक्ष्य पर सहमति बनी।
  • विकासशील देशों के लिए व्यापक जलवायु वित्त महत्वाकांक्षा 2035 तक सालाना कम से कम 1.3 लाख करोड़ डॉलर जुटाने की है।
  • क्रिस बोवेन के अनुसार, छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को वैश्विक जलवायु वित्त का 0.2 प्रतिशत मिलता है।

सीओपी31 की सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि घोषित लक्ष्यों के साथ वित्त जुटाने, उसके वितरण और जरूरतमंद देशों की वास्तविक पहुंच के लिए कितने स्पष्ट इंतजाम बनते हैं।

Originally written on October 26, 2026 and last modified on October 26, 2026.

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