एग्रीवोल्टाइक्स सम्मेलन से खेती और सौर ऊर्जा को जोड़ने पर जोर
सातवां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है। वैश्विक दक्षिण में पहली बार हो रहे इस सम्मेलन की मेजबानी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय कर रहा है। इसमें खेती और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए भूमि के संयुक्त उपयोग पर चर्चा की जा रही है।
एक ही भूमि से खेती और सौर ऊर्जा
एग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्रीपीवी भी कहा जाता है, में एक ही भूमि पर कृषि उत्पादन और सौर फोटोवोल्टिक बिजली उत्पादन साथ-साथ किया जाता है। खेतों में फसलों के ऊपर सौर पैनल लगाए जा सकते हैं या कृषि भूमि के आसपास इस तरह की व्यवस्था की जा सकती है कि खेती जारी रहे। प्रणाली की योजना बनाते समय पैनलों की ऊंचाई और उनके बीच की दूरी, उपयुक्त फसलों का चयन, पानी का प्रबंधन तथा कृषि मशीनों की आवाजाही जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य खाद्य उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को साथ लेकर चलना है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और फसलों के लिए प्रणाली का डिजाइन एक जैसा नहीं हो सकता। इसलिए सम्मेलन में फसल उत्पादकता के साथ नीतिगत ढांचे, वित्तपोषण और किसानों की जरूरतों के अनुरूप कारोबारी मॉडल पर विचार किया जा रहा है।
वैश्विक दक्षिण और किसान-केंद्रित चर्चा
सम्मेलन की थीम ‘वैश्विक दक्षिण को ऊर्जा देना’ है। इसका आयोजन जर्मनी के पर्यावरण, जलवायु कार्रवाई, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा संबंधी संघीय मंत्रालय के सहयोग तथा कोनेक्सियो-पीएसई की साझेदारी में किया जा रहा है। 21 अक्टूबर को केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन का संयुक्त उद्घाटन किया।
इस हाइब्रिड सम्मेलन में 1,200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी हैं। चौहान ने कहा कि नीतियों में छोटे और सीमांत किसानों की व्यावहारिक जरूरतों को शामिल करना जरूरी है। भारत के कृषि समुदाय में उनकी हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक है। यह पहल तभी व्यापक रूप से उपयोगी हो सकती है जब भूमि, खेती और ऊर्जा से जुड़े फैसलों में किसानों की परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।
भारत की योजनाओं और नए संसाधनों से जुड़ाव
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एग्रीपीवी नीति पुस्तिका जारी की गई। इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स एलायंस ने निर्णय लेने का एक उपकरण और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान ने शोध सार-संग्रह प्रस्तुत किया। ये संसाधन नीति, योजना और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े पक्षों को एग्रीवोल्टाइक्स के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
भारत में कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना में विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों और कृषि पंपों के सौरकरण जैसे घटक शामिल हैं। योजना के अगले चरण से देश में एग्रीवोल्टाइक्स को और समर्थन मिलने की अपेक्षा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सातवां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में हो रहा है।
- एग्रीवोल्टाइक्स में एक ही भूमि पर कृषि और सौर फोटोवोल्टिक बिजली उत्पादन किया जाता है।
- पीएम-कुसुम कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग से जुड़ी भारत सरकार की योजना है।
- सम्मेलन में नीति पुस्तिका, निर्णय लेने का उपकरण और शोध सार-संग्रह जारी किए गए।
एग्रीवोल्टाइक्स भारत में कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच तालमेल बनाने का एक संभावित रास्ता है। इसकी सफलता के लिए तकनीकी योजना के साथ किसानों की जरूरतों के अनुरूप नीतियां और वित्तपोषण भी अहम होंगे।