स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस से रेलवे ब्रांडिंग के नए दौर की शुरुआत

स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस से रेलवे ब्रांडिंग के नए दौर की शुरुआत

लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस अब एक कॉरपोरेट ब्रांडिंग समझौते के तहत स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस के नाम से चलेगी। यह भारतीय रेलवे में ब्रांड-नाम वाले ट्रेन संचालन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे रेलवे को गैर-किराया राजस्व बढ़ाने का नया मॉडल मिलता है।

क्या है यह ब्रांडिंग व्यवस्था

ट्रेन संख्या 82501 और 82502 वाली यह सेवा लखनऊ और नई दिल्ली के बीच चलती है। इस व्यवस्था में ट्रेन की ब्रांडिंग और सेवाओं का प्रबंधन आईआरसीटीसी के पास है, जबकि रेलवे का बुनियादी ढांचा भारतीय रेलवे के स्वामित्व में ही रहता है और सामान्य हॉलिंग चार्ज भी वही वसूलता है।

स्प्राइट, जो कोका-कोला का एक पेय ब्रांड है, ने इस रूट के लिए ट्रेन-ब्रांडिंग और विज्ञापन अधिकार हासिल किए हैं। इसके तहत ट्रेन के बाहरी हिस्से पर विनाइल रैप और अंदर विज्ञापन लगाए जा सकेंगे।

रेलवे के लिए गैर-किराया राजस्व का मॉडल

भारतीय रेलवे लंबे समय से ऐसे स्रोतों की तलाश में है, जिनसे यात्री किराए के अलावा भी आय हो सके। विज्ञापन, स्टेशन ब्रांडिंग और ट्रेन ब्रांडिंग इसी श्रेणी में आते हैं। इस तरह की व्यवस्था से रेलवे को अपनी सेवाओं का व्यावसायिक उपयोग करने का अवसर मिलता है, जबकि संचालन और सुरक्षा पर सार्वजनिक नियंत्रण बना रहता है।

तेजस एक्सप्रेस श्रेणी की ट्रेनें भारतीय रेलवे नेटवर्क के भीतर चलने वाली एयर-कंडीशंड सुपरफास्ट सेवाएं हैं। लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस पहले भी चर्चा में रही है, क्योंकि आईआरसीटीसी के संचालन और सेवा प्रबंधन संभालने के बाद इसे भारत की पहली निजी कॉरपोरेट ट्रेन के रूप में देखा गया था।

कब तक चलेगी यह ब्रांडिंग

रिपोर्टों के अनुसार, इस ट्रेन की सक्रिय ब्रांडिंग अवधि 19 अगस्त 2026 से 11 नवंबर 2026 तक तय की गई है। हालांकि अनुबंध की अवधि को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए, जिनमें तीन महीने और छह महीने का उल्लेख भी किया गया, लेकिन ट्रेन के लिए ब्रांडिंग शेड्यूल ऊपर बताई गई अवधि के अनुसार निर्धारित है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईआरसीटीसी का पूरा नाम Indian Railway Catering and Tourism Corporation है।
  • तेजस एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की एयर-कंडीशंड सुपरफास्ट ट्रेन श्रेणी है।
  • 82501 और 82502 लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस के ट्रेन नंबर हैं।
  • भारतीय रेलवे में non-fare revenue में विज्ञापन और ब्रांडिंग अधिकार जैसे स्रोत शामिल होते हैं।

यह पहल दिखाती है कि भारतीय रेलवे अब पारंपरिक आय स्रोतों से आगे बढ़कर ब्रांड साझेदारी और विज्ञापन आधारित मॉडल को भी अपनाने लगा है। आने वाले समय में ऐसी व्यवस्थाएं रेलवे की आय संरचना को और विविध बना सकती हैं।

Originally written on August 14, 2026 and last modified on August 14, 2026.

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