सैटेलाइट इंटरनेट के लिए भारत में नया नियामकीय ढांचा तय
भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन यानी उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचा तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दूरसंचार विभाग की शीर्ष निर्णयकारी इकाई डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन ने 8 सितंबर 2026 को ट्राई की अधिकांश सिफारिशों को मंजूरी दे दी। इससे स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस जैसी कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन, शुल्क और सेवा शुरू करने की प्रक्रिया स्पष्ट हुई है।
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए क्या तय हुआ
मंजूर ढांचे के तहत सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम को शुरुआत में पांच साल के लिए प्रशासनिक आधार पर आवंटित किया जाएगा। इसमें दो साल के विस्तार का भी प्रावधान रखा गया है। सैटेलाइट कम्युनिकेशन में उपग्रहों के जरिए ग्राउंड स्टेशन और यूजर टर्मिनल के बीच आवाज, डेटा और ब्रॉडबैंड सेवाएं भेजी जाती हैं।
यह मॉडल उन ऑपरेटरों पर लागू होगा जो भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करना चाहते हैं। हालांकि, सेवा शुरू करने से पहले उन्हें स्पेक्ट्रम आवंटन के साथ-साथ आवश्यक सुरक्षा मंजूरियां भी लेनी होंगी।
शुल्क ढांचे में क्या बदलाव आया
डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए समायोजित सकल राजस्व यानी AGR का 5 प्रतिशत स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क मंजूर किया है। यह ट्राई के प्रस्तावित 4 प्रतिशत से अधिक है।
सरकार द्वारा अधिसूचित दूरस्थ, ग्रामीण या कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले ऑपरेटरों को रियायती दर पर 4 प्रतिशत AGR शुल्क देना होगा। यह व्यवस्था उन सेवाओं पर लागू होगी जो आवंटित स्पेक्ट्रम का उपयोग व्यावसायिक संचालन के लिए करेंगी।
किन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली
दूरसंचार विभाग ने शहरी उपभोक्ताओं से सालाना 500 रुपये शुल्क लेने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसी तरह, डिजिटल भारत निधि के जरिए सैटेलाइट यूजर टर्मिनलों पर सब्सिडी देने का सुझाव भी स्वीकार नहीं किया गया।
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए इस्तेमाल होने वाले यूजर टर्मिनलों की कीमत लगभग 20,000 से 50,000 रुपये के बीच बताई गई है। विभाग ने इन दोनों प्रस्तावों को लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दिया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ट्राई की स्थापना ट्राई अधिनियम, 1997 के तहत की गई थी।
- डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन, दूरसंचार विभाग के अंतर्गत काम करता है, जो संचार मंत्रालय का हिस्सा है।
- समायोजित सकल राजस्व यानी AGR, भारत में दूरसंचार शुल्क और लाइसेंस संबंधी देनदारियों की गणना का आधार है।
- डिजिटल भारत निधि, टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 के तहत यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड का नया नाम है।
अब आगे की प्रक्रिया में अंतिम मूल्य निर्धारण और प्रशासनिक आवंटन पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी जरूरी होगी। इसके बाद ही सुरक्षा मंजूरियों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर सेवाएं शुरू की जा सकेंगी।