सीबीएफसी के नए अध्यक्ष बने शशि शेखर वेम्पति
भारत के फिल्म प्रमाणन तंत्र में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति के तहत प्रसार भारती के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेम्पति को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह पद भारतीय फिल्म उद्योग में सामग्री के नियमन और प्रमाणन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की भूमिका
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड, जिसे आमतौर पर सेंसर बोर्ड भी कहा जाता है, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक संस्था है। इसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है। यह बोर्ड फिल्मों, ट्रेलरों और अन्य ऑडियो-विजुअल सामग्री का परीक्षण करता है, ताकि उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त बनाया जा सके। सीबीएफसी का कार्य केवल सेंसरशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फिल्मों को उचित श्रेणी में वर्गीकृत कर दर्शकों को सामग्री के बारे में जानकारी भी प्रदान करता है।
सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 का महत्व
भारत में फिल्म प्रमाणन का कानूनी आधार सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 है। यह अधिनियम सीबीएफसी को फिल्मों को प्रमाणित करने और उनके सार्वजनिक प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। यह कानून फीचर फिल्मों, लघु फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और अन्य सिनेमैटोग्राफिक कार्यों पर लागू होता है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि फिल्मों की सामग्री सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी मानकों के अनुरूप हो।
भारत में फिल्म प्रमाणन की श्रेणियां
सीबीएफसी फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में प्रमाणित करता है, ताकि दर्शकों की आयु और संवेदनशीलता के अनुसार सामग्री का चयन किया जा सके।
- यू (U): सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त
- यू/ए (U/A): 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अभिभावक की निगरानी आवश्यक
- ए (A): केवल वयस्कों के लिए
- एस (S): विशेष वर्ग के दर्शकों के लिए
इन श्रेणियों के माध्यम से दर्शकों को फिल्म की प्रकृति और उपयुक्तता के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीबीएफसी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 भारत में फिल्म प्रमाणन का मुख्य कानून है।
- सीबीएफसी का मुख्यालय मुंबई में स्थित है।
- यू, यू/ए, ए और एस भारत में प्रमुख फिल्म प्रमाणन श्रेणियां हैं।
शशि शेखर वेम्पति की नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता को और बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुभव से इस महत्वपूर्ण संस्था को नई दिशा मिलने की संभावना है।