सीएपीएफ में वरिष्ठ पदों की नियुक्ति पर नए कानून से बहस
केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) सामान्य प्रशासन अधिनियम, 2026, 8 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। यह कानून सीएपीएफ में समूह ‘क’ के सामान्य ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती तथा सेवा-शर्तों के लिए साझा ढाँचा तय करता है। इसके कुछ प्रावधानों को सेवारत सीएपीएफ अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
कानून का दायरा और लागू होने की समयरेखा
इस कानून का उद्देश्य सीएपीएफ के प्रशासन और कामकाज के लिए एक समान वैधानिक व्यवस्था बनाना है। केंद्र सरकार के अनुसार, अलग-अलग सेवा नियमों के कारण पैदा होने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को साझा कानून के जरिए कम किया जा सकेगा।
विधेयक 27 मार्च 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया। उच्च सदन ने इसे 1 अप्रैल को पारित किया और लोकसभा ने 2 अप्रैल को मंजूरी दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 अप्रैल 2026 को इस पर स्वीकृति दी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से 8 अक्टूबर को कानून के लागू होने की तारीख निर्धारित की।
वरिष्ठ पदों पर प्रतिनियुक्ति का प्रावधान
अधिनियम में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए वरिष्ठ पदों का हिस्सा तय किया गया है। इसके अनुसार, महानिरीक्षक के 50 प्रतिशत पद और अतिरिक्त महानिदेशक के कम-से-कम 67 प्रतिशत पद आईपीएस अधिकारियों के लिए निर्धारित हैं। महानिदेशक और विशेष महानिदेशक के पद भी आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित रखे गए हैं।
सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों का कहना है कि इन प्रावधानों से बलों के भीतर पदोन्नति पाकर शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचने के अवसर सीमित हो सकते हैं। केंद्र सरकार का पक्ष है कि आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से बलों के संचालन और केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय में सहायता मिलती है। आईपीएस संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत स्थापित अखिल भारतीय सेवाओं में शामिल है; इसके अधिकारी केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर सेवाएँ देते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय में कानून को चुनौती
23 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को सीएपीएफ के वरिष्ठ पदों पर आईपीएस प्रतिनियुक्ति धीरे-धीरे घटाने और समय पर पदोन्नति सुनिश्चित करने के लिए कैडर समीक्षा करने का निर्देश दिया था। केंद्र की पुनर्विचार याचिका 28 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दी गई।
याचिकाकर्ता अधिकारियों का तर्क है कि 2026 का अधिनियम सर्वोच्च न्यायालय के पहले दिए गए निर्देशों से टकराता है। कानून की संवैधानिक वैधता और इससे संबंधित अवमानना याचिकाओं पर 15 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की विशेष पीठ सुनवाई करने वाली है। सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि नए वैधानिक प्रावधानों और पहले के न्यायिक निर्देशों के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संविधान का अनुच्छेद 312 संसद को अखिल भारतीय सेवा बनाने का अधिकार देता है; इसके लिए राज्यसभा का निर्धारित विशेष प्रस्ताव आवश्यक है।
- भारतीय पुलिस सेवा एक अखिल भारतीय सेवा है।
- सीएपीएफ सामान्य प्रशासन अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति 9 अप्रैल 2026 को मिली।
- सीएपीएफ कैडर समीक्षा और आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश 23 मई 2025 को आए थे।
अब इस कानून का क्रियान्वयन और सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई, दोनों सीएपीएफ अधिकारियों की पदोन्नति तथा वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था के लिए अहम होंगे।