सिलीगुड़ी कॉरिडोर में चौथी रेल लाइन से बढ़ेगी रणनीतिक कनेक्टिविटी
केंद्र सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के मालदा–न्यू जलपाईगुड़ी सेक्शन में चौथी रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। यह वही संकरा भू-भाग है जिसे उसकी आकृति और रणनीतिक महत्व के कारण ‘चिकन’स नेक’ कहा जाता है। इस फैसले के साथ इस अहम मार्ग पर पहले से प्रस्तावित तीसरी लाइन की योजना को भी और मजबूती मिली है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्यों है इतना अहम
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित एक बेहद संकरा भू-भाग है, जो मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। इसकी सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 20 से 22 किलोमीटर बताई जाती है। यही कारण है कि यह क्षेत्र सड़क, रेल और अन्य जरूरी संपर्क सेवाओं के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूर्वोत्तर राज्यों की आवाजाही, आपूर्ति और कनेक्टिविटी का बड़ा हिस्सा इसी कॉरिडोर पर निर्भर करता है। इसलिए यहां रेल अवसंरचना का विस्तार केवल यात्री सुविधा का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक और लॉजिस्टिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
रेल नेटवर्क में विस्तार और नई परियोजनाएं
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के अनुसार, इस मंजूरी में मालदा–न्यू जलपाईगुड़ी सेक्शन में चौथी लाइन के साथ-साथ टिनमाई घाट और बागडोगरा के बीच लगभग 29 किलोमीटर लंबी डबल-लाइन भूमिगत रेल परियोजना भी शामिल है। इसके अलावा बारसोई सेक्शन में डबलिंग का काम भी जारी है।
क्षेत्र में बढ़ते रेल यातायात को देखते हुए यह विस्तार किया जा रहा है। कटिहार मंडल इस व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है और उत्तर बंगाल तथा आसपास के क्षेत्रों में यात्री और माल ढुलाई दोनों में अहम भूमिका निभाता है।
न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन और सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी
न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन का पुनर्विकास भी चल रहा है और इसके अप्रैल 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह स्टेशन उत्तर बंगाल का प्रमुख रेल जंक्शन है और असम, बिहार तथा पूर्वोत्तर की ओर जाने वाले मार्गों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है।
इसके साथ ही जोगबनी, राधिकापुर और बालुरघाट से नई लोकल ट्रेन सेवाएं शुरू करने की योजना भी आगे बढ़ रही है। ये सभी स्थान पूर्वी भारत के सीमा और फ्रंटियर क्षेत्रों से जुड़े हैं, इसलिए इन सेवाओं से क्षेत्रीय संपर्क और आवागमन में सुधार की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ‘चिकन’स नेक’ कहा जाता है क्योंकि यह भारत का बहुत संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण भू-भाग है।
- यह कॉरिडोर मुख्य भारत को अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम से जोड़ता है।
- नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे भारतीय रेल के 18 जोनों में से एक है।
- न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पश्चिम बंगाल का प्रमुख जंक्शन है और पूर्वोत्तर की ओर जाने वाली ब्रॉड-गेज कनेक्टिविटी में अहम भूमिका निभाता है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर में रेल विस्तार का यह कदम पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक रेल नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।