सिक्किम में 40 खतरनाक हिमनदीय झीलों की पहचान, GLOF जोखिम पर नई तैयारी

सिक्किम में 40 खतरनाक हिमनदीय झीलों की पहचान, GLOF जोखिम पर नई तैयारी

सिक्किम ने उच्च जोखिम वाली 40 हिमनदीय झीलों की पहचान की है, जिनमें 16 झीलें श्रेणी A, 2 श्रेणी B, 9 श्रेणी C और 13 झीलें अभी अ-श्रेणीबद्ध हैं। राज्य ने इन झीलों से नीचे बसे इलाकों को संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF के खतरे से बचाने के लिए भारत की पहली समर्पित जोखिम-न्यूनीकरण प्रोटोकॉल पर भी काम शुरू किया है।

हिमनदीय झीलों से क्यों बढ़ता है खतरा

GLOF वह स्थिति है जब किसी हिमनदीय झील का पानी अचानक बाहर निकल आता है। यह बांध टूटने, बर्फ के धंसने, भूस्खलन, हिमस्खलन या मोरेन यानी हिमोढ़ के टूटने से हो सकता है। पहाड़ी घाटियों में ऐसा प्रवाह अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और नदी-तल के कटाव का कारण बन सकता है। सिक्किम जैसे ऊंचाई वाले हिमालयी राज्य में यह खतरा खास तौर पर गंभीर माना जाता है, क्योंकि यहां कई बस्तियां और ढांचागत परियोजनाएं नदियों के किनारे या ढलानों पर स्थित हैं।

कैसे की जा रही है निगरानी और वर्गीकरण

इन झीलों की निगरानी सिक्किम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपी गई है। आकलन के लिए उपग्रह चित्र, रिमोट सेंसिंग, भूभौतिकीय जांच, बैथिमेट्रिक अध्ययन और स्थल निरीक्षण का उपयोग किया जा रहा है। इन तरीकों से झील की जल-धारण क्षमता, निकास की स्थिरता और आसपास के भू-आकृतिक हालात का मूल्यांकन किया जाता है। श्रेणी A को सबसे अधिक जोखिम वाली झीलें माना जाता है, जबकि श्रेणी B और C में अपेक्षाकृत कम, लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण खतरा रहता है। अ-श्रेणीबद्ध झीलों पर अंतिम वर्गीकरण से पहले और वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

सिक्किम में जोखिम घटाने के लिए क्या कदम

राज्य सरकार ने शाको छो झील में सौर ऊर्जा से चलने वाली पंपिंग व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भेजी है। इसका उद्देश्य झील का जलस्तर कम करना है, क्योंकि इसे राज्य की सबसे संवेदनशील हिमनदीय झीलों में से एक माना गया है। इसके अलावा, केंद्रीय जल आयोग और सिक्किम सरकार ल्होनक कॉम्प्लेक्स के मुगुथांग के पास डोलमा सांपा में बाढ़-रोधक संरचना के लिए भी परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। गुरुडोंगमार कॉम्प्लेक्स के आउटलेट पर मोरेन प्लग वॉल बनाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ब्रह्मपुत्र बोर्ड के साथ काम कर रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत भारत की शीर्ष आपदा प्रबंधन संस्था है।
  • केंद्रीय जल आयोग जल शक्ति मंत्रालय के अधीन एक तकनीकी संगठन है।
  • बैथिमेट्रिक अध्ययन जलाशयों या झीलों की गहराई और आकार मापने के लिए किए जाते हैं।
  • सिक्किम में अक्टूबर 2023 की GLOF घटना से भारी नुकसान हुआ था और तेजस्टा बेसिन में जोखिम-न्यूनीकरण पर ध्यान बढ़ा था।

सिक्किम की यह पहल हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु-संवेदनशील आपदाओं के बढ़ते खतरे की याद दिलाती है। ऊंचाई वाले इलाकों में झीलों की वैज्ञानिक निगरानी, समय रहते चेतावनी और संरचनात्मक सुरक्षा उपाय अब आपदा प्रबंधन का अनिवार्य हिस्सा बनते जा रहे हैं।

Originally written on September 5, 2026 and last modified on September 5, 2026.

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