समुद्र-स्तर वृद्धि पर संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक रुख
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने समुद्र-स्तर वृद्धि पर अपनी पहली घोषणा 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 81वें सत्र के उच्च-स्तरीय सम्मेलन में अपनाई। यह घोषणा उन देशों के लिए अहम मानी जा रही है जिनके तटीय और द्वीपीय क्षेत्र बढ़ते समुद्र के कारण खतरे में हैं, क्योंकि इसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी देश का भू-भाग जलमग्न हो जाए, तो उसकी राज्य-सत्ता स्वतः समाप्त नहीं मानी जाएगी।
समुद्र बढ़ने पर राज्यत्व की कानूनी सुरक्षा
घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह समुद्र-स्तर वृद्धि से प्रभावित देशों की कानूनी स्थिति को लेकर एक स्थिर दृष्टिकोण देती है। इसमें कहा गया है कि भूमि क्षेत्र घटने या डूबने की स्थिति में भी किसी राज्य की मान्यता और उसका अस्तित्व अपने-आप खत्म नहीं होता। यह छोटे द्वीपीय देशों और निम्न-तटीय क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सबसे पहले और सबसे तीव्र रूप में दिखाई देता है।
इसके साथ ही घोषणा समुद्री सीमाओं की निरंतरता का समर्थन करती है। इसमें प्रादेशिक समुद्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र जैसे समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता पर जोर दिया गया है, ताकि तटरेखा बदलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अधिकारों पर अनिश्चितता न पैदा हो।
जलवायु अनुकूलन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी संदर्भ
चार पन्नों की इस घोषणा में कमजोर तटीय समुदायों की सुरक्षा, समय रहते चेतावनी प्रणाली, तटीय संरक्षण और अनुकूलन वित्त को मजबूत करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य केवल कानूनी स्थिति स्पष्ट करना नहीं, बल्कि उन उपायों को भी बढ़ावा देना है जिनसे समुद्र-स्तर वृद्धि के असर को कम किया जा सके।
यह कदम अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं की हालिया राय के बाद आया है। जुलाई 2025 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाहकारी राय और 2024 में समुद्र के कानून पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण की राय में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और समुद्र-स्तर वृद्धि से जुड़े राज्यों के दायित्वों पर चर्चा की गई थी। इस तरह संयुक्त राष्ट्र की यह घोषणा जलवायु न्याय और समुद्री कानून, दोनों को एक साथ जोड़ती है।
वैश्विक असर और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
समुद्र-स्तर वृद्धि अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि संप्रभुता, सीमाओं, प्रवासन और संसाधन अधिकारों से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रश्न बन चुकी है। 2024 में वैश्विक औसत समुद्र-स्तर में 5.9 मिलीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक बढ़ोतरी बताया गया। यह आंकड़ा बताता है कि समस्या कितनी तेजी से गंभीर हो रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र महासभा संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्शकारी अंग है और इसके 193 सदस्य देश हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है और इसका मुख्यालय द हेग में है।
- समुद्र के कानून पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण की स्थापना संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय के तहत हुई थी।
- लगभग 77 करोड़ लोग उच्च ज्वार रेखा से पांच मीटर से कम ऊंचाई पर रहते हैं।
यह घोषणा उन देशों के लिए कूटनीतिक और कानूनी सहारा है जो समुद्र-स्तर वृद्धि की सीधी मार झेल रहे हैं। आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वैश्विक बहस में समुद्री सीमाओं और राज्यत्व का यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है।