समुद्र मंथन से ऊर्जा सुरक्षा की नई रणनीति

समुद्र मंथन से ऊर्जा सुरक्षा की नई रणनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘समुद्र मंथन’ के लिए 85,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की। यह योजना भारत में अपतटीय तेल और गैस खोज को गति देने के लिए बनाई गई है और इसे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना के रूप में लागू किया जा रहा है।

समुद्र मंथन योजना क्या है

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को इसे केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी थी, जिसकी अवधि वित्त वर्ष 2030-31 तक तय की गई है। योजना का पहला चरण 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृत हुआ था, जबकि स्वतंत्रता दिवस पर घोषित राशि 85,000 करोड़ रुपये बताई गई। इसका उद्देश्य समुद्र के भीतर छिपे ऊर्जा संसाधनों की खोज को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर आगे बढ़ाना है।

इस योजना के दायरे में उच्च-गुणवत्ता वाली सिस्मिक मैपिंग, गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषणात्मक ड्रिलिंग, सीमांत बेसिनों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, साझा अपतटीय अवसंरचना और एकीकृत तेल एवं गैस विनिर्माण व सेवाओं का क्षेत्र शामिल है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा महत्व

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88.5% आयात करता है और प्राकृतिक गैस की लगभग आधी आवश्यकता भी बाहर से पूरी करता है। ऐसे में समुद्री क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि इस योजना से आयात निर्भरता घटाने और दीर्घकाल में घरेलू भंडार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

आधिकारिक आकलनों के अनुसार, इस पहल से 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समतुल्य से अधिक भंडार वृद्धि की संभावना जताई गई है। तेल समतुल्य की यह इकाई अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों की तुलना एक समान आधार पर करने के लिए उपयोग की जाती है।

समुद्री क्षेत्र और खोज की नई संभावनाएं

भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र 23.6 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक फैला हुआ है। आधिकारिक समुद्री आंकड़ों के अनुसार, पहले अपतटीय ‘नो-गो’ क्षेत्र 13.67 लाख वर्ग किलोमीटर तक था, जिसे घटाकर 24,832 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया है। इससे लगभग 99% तटीय जल क्षेत्र अन्वेषण के लिए खुल गया है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्री तल की भूगर्भीय संरचना को समझने के लिए सिस्मिक मैपिंग की जाती है, और उसके बाद ही ड्रिलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्र में ड्रिलिंग अपतटीय हाइड्रोकार्बन खोज का प्रमुख तरीका है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र समुद्री क्षेत्र की वह सीमा है जिसे संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून संधि के तहत मान्यता प्राप्त है।
  • सिस्मिक मैपिंग का उपयोग भूमिगत भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन करने के लिए किया जाता है।
  • केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं का वित्तपोषण और क्रियान्वयन सीधे केंद्र सरकार करती है।
  • लाल किला हर वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का स्थल होता है।

समुद्र मंथन योजना भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि यह घरेलू खोज, तकनीकी क्षमता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—तीनों को एक साथ जोड़ती है।

Originally written on August 15, 2026 and last modified on August 15, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *