समुद्री मछली पकड़ने के रास्ते पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए एक तय चैनल के जरिए प्रादेशिक जल से विशेष आर्थिक क्षेत्र तक जाने के नियम बनाए। अदालत ने कहा कि अनुमति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से व्यवहार में एक तरह की अनकही रोक लग सकती है, खासकर तब जब आवेदन लंबित पड़े रहें और कोई औपचारिक प्रतिबंध घोषित न किया गया हो।
मामला किस बात पर केंद्रित था
यह विवाद उन नौकाओं के आवागमन से जुड़ा था जो पर्स सीन नेट लेकर समुद्र में जाती हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें तटीय जल से आगे जाकर मछली पकड़ने के लिए सुगम और स्पष्ट अनुमति व्यवस्था मिलनी चाहिए। अदालत की पीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और अलोक अराधे शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य प्रशासन को मिलकर परमिट मंजूरी की प्रक्रिया को समन्वित करना होगा। अदालत का रुख इस बात की ओर भी संकेत करता है कि समुद्री संसाधनों तक पहुंच केवल कागजी अनुमति पर नहीं, बल्कि समयबद्ध प्रशासनिक कार्रवाई पर भी निर्भर करती है।
समुद्री क्षेत्र और नियमों की पृष्ठभूमि
भारत में प्रादेशिक जल तटरेखा से 12 समुद्री मील तक माने जाते हैं, जबकि विशेष आर्थिक क्षेत्र 200 समुद्री मील तक फैला होता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के ढांचे में यह सीमा समुद्री संसाधनों के उपयोग और नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
तमिलनाडु में 12 समुद्री मील के भीतर मछली पकड़ने का नियमन तमिलनाडु मरीन फिशिंग रेगुलेशन रूल्स, 2020 के तहत होता है, जबकि 12 समुद्री मील से बाहर ऑफशोर फिशिंग केंद्रीय ईईजेड नियम, 2025 के अधीन आती है। इसी कारण राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों की भूमिका इस मामले में अहम हो जाती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
अदालत की टिप्पणी का सीधा असर उन मछुआरों पर पड़ सकता है जो समुद्र में दूर तक जाकर जीविका चलाते हैं। यदि अनुमति व्यवस्था अस्पष्ट या धीमी रहती है, तो यह उनके पेशे और व्यापार के अधिकार को प्रभावित कर सकती है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) किसी भी व्यक्ति को पेशा, व्यापार या व्यवसाय करने का अधिकार देता है, और अदालत ने इसी संदर्भ में प्रशासनिक देरी पर चिंता जताई।
तमिलनाडु में ReALCRaft Portal के जरिए मछली पकड़ने से जुड़ी अनुमतियों का प्रसंस्करण किया जाता है। 3 अगस्त 2026 तक 257 आवेदनों में से 226 लंबित थे और केवल छह परमिट जारी किए गए थे। यही आंकड़े दिखाते हैं कि स्पष्ट नियमों और समयबद्ध निर्णय की जरूरत क्यों महसूस की गई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत का प्रादेशिक जल तट से 12 समुद्री मील तक माना जाता है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र 200 समुद्री मील तक फैला होता है और इसमें समुद्री संसाधनों पर तटीय राज्य के विशेष अधिकार होते हैं।
- पर्स सीन नेट बड़े घेरने वाले जाल होते हैं, जिनका उपयोग झुंड में रहने वाली मछलियों को पकड़ने में किया जाता है।
- अनुच्छेद 19(1)(g) व्यवसाय, व्यापार और पेशे के अधिकार की संवैधानिक सुरक्षा देता है।
यह फैसला समुद्री मछली पकड़ने के नियमन में राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को रेखांकित करता है। साथ ही, यह मछुआरा समुदाय के लिए पारदर्शी और समयबद्ध अनुमति प्रणाली की अहमियत भी सामने लाता है।