समुद्री ड्रोन: आधुनिक नौसैनिक युद्ध और समुद्री सुरक्षा की नई तकनीक
समुद्री सुरक्षा और आधुनिक नौसैनिक अभियानों में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसी दिशा में समुद्री ड्रोन, जिन्हें मानव रहित समुद्री प्रणालियाँ भी कहा जाता है, दुनिया की प्रमुख नौसेनाओं के लिए महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं। ये प्लेटफॉर्म समुद्र की सतह पर या पानी के भीतर बिना किसी चालक दल के संचालित होते हैं। जून 2026 में इंडो-पैसिफिक और मध्य-पूर्व क्षेत्र में कई देशों ने सैन्य अभ्यास, रसद अभियानों और बचाव कार्यों में इनका सफल उपयोग किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वायत्त तकनीकों के विकास के साथ समुद्री ड्रोन भविष्य की नौसैनिक रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।
समुद्री ड्रोन के प्रकार और उनकी विशेषताएँ
समुद्री ड्रोन मुख्य रूप से दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किए जाते हैं। पहला, मानव रहित सतही पोत, जो समुद्र की सतह पर संचालित होते हैं। इनका उपयोग निगरानी, संचार, खुफिया जानकारी एकत्र करने और आवश्यकता पड़ने पर हथियार ले जाने के लिए किया जाता है। दूसरी श्रेणी मानव रहित पानी के भीतर संचालित वाहनों की है, जो समुद्र की गहराई में कार्य करते हैं। इनका उपयोग निगरानी, समुद्री हमलों, बारूदी सुरंगों की पहचान और निष्क्रियकरण तथा रसद सहायता जैसे कार्यों में किया जाता है। इनके बड़े संस्करण, जिन्हें एक्स्ट्रा-लार्ज अनक्रूड अंडरवाटर व्हीकल कहा जाता है, लंबी दूरी और भारी भार वाले अभियानों के लिए विकसित किए गए हैं।
वर्ष 2026 में प्रमुख सैन्य उपयोग
25 जून 2026 को फिलीपींस में अमेरिकी विशेष बलों ने यूक्रेन द्वारा विकसित मैगुरा श्रेणी के मानव रहित सतही पोतों का परीक्षण किया। इस परीक्षण के दौरान एक ड्रोन पोत ने एक निष्क्रिय लक्ष्य जहाज को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर डुबो दिया, जिससे इसकी आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन हुआ। जून 2026 की शुरुआत में अमेरिकी नौसेना की टास्क फोर्स 59 द्वारा संचालित एक समुद्री ड्रोन ने ओमान के तट के निकट बचाव अभियान चलाया। इस अभियान में अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद दो अमेरिकी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचाया गया, जिससे इन प्रणालियों की मानवीय सहायता क्षमता भी सामने आई।
सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में बढ़ता महत्व
सालाक्निब 2026 सैन्य अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना ने फिलीपींस में सौर ऊर्जा से संचालित ड्रोन नौकाओं का उपयोग रसद आपूर्ति की सुरक्षा के लिए किया। इसके अलावा अमेरिका ने फिलीपींस को ओशन एयरो ट्राइटन नौकायन आधारित मानव रहित सतही पोत भी उपलब्ध कराए, जिनका उद्देश्य फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी करना है। 24 जून से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) अभ्यास, जिसमें 31 देशों ने भाग लिया, में स्वायत्त सतही पोतों का बहुराष्ट्रीय रसद अभियानों के लिए प्रदर्शन करने की योजना बनाई गई। यह दर्शाता है कि भविष्य के नौसैनिक अभियानों में स्वायत्त प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रक्षा उद्योग के अनुसार वर्ष 2025 में वैश्विक स्वायत्त समुद्री रक्षा प्रणालियों का बाजार लगभग 3.8 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया, जबकि वर्ष 2034 तक इसके लगभग 12.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इस वृद्धि का प्रमुख कारण मानव रहित नौसैनिक प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वायत्त तकनीकों का तेजी से विस्तार है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- समुद्री ड्रोन ऐसे नौसैनिक प्लेटफॉर्म हैं जो बिना चालक दल के समुद्र की सतह या पानी के भीतर संचालित होते हैं।
- टास्क फोर्स 59 अमेरिकी नौसेना की वह इकाई है, जो मध्य-पूर्व में मानव रहित समुद्री अभियानों से जुड़ी है।
- रिमपैक (रिम ऑफ द पैसिफिक) विश्व के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक सैन्य अभ्यासों में से एक है।
- फिलीपींस का विशेष आर्थिक क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के अनुसार आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक विस्तृत होता है।
समुद्री ड्रोन आधुनिक नौसैनिक क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। निगरानी, सुरक्षा, बचाव कार्य, रसद प्रबंधन और सैन्य अभियानों में इनकी बढ़ती भूमिका भविष्य की समुद्री रणनीतियों को नई दिशा दे रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वायत्त तकनीकों के विकास के साथ इन प्रणालियों का महत्व आने वाले वर्षों में और अधिक बढ़ने की संभावना है।