संकटग्रस्त देशों के लिए विश्व बैंक की 100 अरब डॉलर तक मदद की तैयारी

संकटग्रस्त देशों के लिए विश्व बैंक की 100 अरब डॉलर तक मदद की तैयारी

विश्व बैंक 30 से 40 देशों के साथ संभावित आपात वित्तीय सहायता पर चर्चा कर रहा है। बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा के अनुसार, वैश्विक आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर संस्था 100 अरब डॉलर तक का संकट वित्त जुटा सकती है। यह कोविड-19 महामारी के दौरान वितरित 70 अरब डॉलर से अधिक होगा। हालांकि, 100 अरब डॉलर अभी संभावित जुटाव की सीमा है—यह राशि न तो मंजूर हो चुकी है और न ही वितरित की गई है।

ऊर्जा और जलवायु जोखिम से बढ़ा दबाव

मध्य पूर्व में फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद विश्व बैंक ने शुरुआती तौर पर 25 अरब डॉलर का संकट वित्त उपलब्ध कराया था। विकासशील देशों पर ऊर्जा और उर्वरक की बढ़ती कीमतों, ऊंची उधारी लागत और जलवायु जोखिमों का दबाव है। संभावित रूप से तेज अल नीनो की स्थिति भी इन जोखिमों में शामिल है, क्योंकि इससे मौसम और कृषि पर असर पड़ सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था शुरुआती आशंकाओं की तुलना में अधिक मजबूत बनी हुई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश और तेल बाजार में हुए बदलावों ने भी कुछ सहारा दिया है। इसी वजह से 11 अक्टूबर तक शुरुआती आपात वित्त का उपयोग करने वाले देशों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही थी।

नई उधारी के बजाय परियोजनाओं में फेरबदल

संकट सहायता का एक रास्ता पहले से मंजूर विश्व बैंक परियोजनाओं के धन का पुनर्विनियोजन है। करीब 35 अरब डॉलर की मौजूदा परियोजना राशि को जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है। इसके साथ उपलब्ध वित्त को मिलाकर देशों के लिए 50 से 60 अरब डॉलर तक पहुंच संभव हो सकती है। इस व्यवस्था से कुछ देशों को नई आपात ऋण राशि लेने के बजाय मौजूदा विकास परियोजनाओं का धन तत्काल जरूरतों की ओर मोड़ने का विकल्प मिलेगा।

100 अरब डॉलर का संभावित आंकड़ा व्यापक संकट वित्त जुटाने की सीमा को दर्शाता है, न कि देशों को मिलने वाली निश्चित सहायता को। सहायता की वास्तविक मात्रा जरूरत, उपलब्ध संसाधनों और संबंधित वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

विकासशील देशों पर भारी कर्ज भुगतान

विकासशील देशों को 2026 में लगभग 400 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाना है। इसमें करीब एक-तिहाई हिस्सा ब्याज भुगतान का है। ऐसे में आपात वित्तीय सहायता से ऊर्जा, खाद्य उत्पादन और विकास परियोजनाओं पर पड़ने वाले दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है। विश्व बैंक संकट के समय सहायता देने के साथ दीर्घकालीन विकास परियोजनाओं को वित्त भी देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

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  • विश्व बैंक समूह के दो प्रमुख संस्थान अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) और अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) हैं।
  • आईबीआरडी मुख्यतः मध्यम आय वाले और ऋण लेने में सक्षम निम्न आय वाले देशों को ऋण देता है।
  • आईडीए सबसे गरीब देशों को अनुदान और रियायती ऋण उपलब्ध कराता है।
  • विश्व बैंक की स्थापना 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के बाद हुई और उसने 1946 में कामकाज शुरू किया।

विश्व बैंक की प्रस्तावित व्यवस्था का महत्व इस बात में है कि संकट के समय देशों को नई उधारी और पहले से स्वीकृत परियोजना राशि के पुनर्विनियोजन—दोनों विकल्प मिल सकते हैं।

Originally written on October 12, 2026 and last modified on October 12, 2026.

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