भारत का 2047 इस्पात लक्ष्य: क्षमता में करीब तीन गुना विस्तार

भारत का 2047 इस्पात लक्ष्य: क्षमता में करीब तीन गुना विस्तार

इस्पात मंत्रालय के मसौदा राष्ट्रीय इस्पात नीति विजन 2047 में भारत की कच्चे इस्पात की वार्षिक उत्पादन क्षमता को 2047 तक 60.4 करोड़ टन पहुंचाने का प्रस्ताव है। अक्टूबर 2026 में देश की स्थापित क्षमता करीब 22 से 22.2 करोड़ टन सालाना थी। मसौदा उत्पादन विस्तार के साथ खपत बढ़ाने और इस्पात निर्माण से होने वाले उत्सर्जन को घटाने पर भी जोर देता है।

क्षमता और खपत के लिए दीर्घकालीन लक्ष्य

मसौदे के अनुसार, 2047 तक तैयार इस्पात की खपत 50.5 करोड़ टन और प्रति व्यक्ति खपत 302 किलोग्राम करने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2025-26 में तैयार इस्पात की खपत 16.4 करोड़ टन और प्रति व्यक्ति खपत 116 किलोग्राम थी। इससे आने वाले वर्षों में निर्माण, बुनियादी ढांचे, मशीनरी और विनिर्माण क्षेत्रों की मांग को पूरा करने के लिए क्षमता बढ़ाने की जरूरत का संकेत मिलता है।

मसौदे में 2030 तक कच्चे इस्पात की क्षमता 29.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 में 2030-31 तक 30 करोड़ टन क्षमता का लक्ष्य था। नया दस्तावेज 2017 की नीति का स्थान लेने के लिए प्रस्तावित है। कच्चा इस्पात इस्पात निर्माण की प्राथमिक उपज है, जबकि तैयार इस्पात को प्रसंस्कृत करके निर्माण और अन्य उपयोगों के लिए तैयार किया जाता है। क्षमता से आशय किसी अवधि में संयंत्रों की अधिकतम उत्पादन-योग्यता से है, न कि वास्तविक उत्पादन से।

उत्सर्जन घटाने और कच्चे माल की चुनौती

इस्पात उत्पादन में प्रति टन कच्चे इस्पात पर औसत कार्बन उत्सर्जन को 2.54 टन से घटाकर 2047 तक 1.54 टन करने का प्रस्ताव है। उत्सर्जन की मात्रा उत्पादन की तकनीक और इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा पर निर्भर करती है। इस्पात बनाने में ब्लास्ट फर्नेस-बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस और विद्युत आर्क भट्ठी जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।

60.4 करोड़ टन क्षमता के लिए मसौदे में सालाना 77.2 करोड़ टन लौह अयस्क और 23.6 करोड़ टन कोकिंग कोयले की जरूरत का अनुमान है। भारत अपनी कोकिंग कोयले की जरूरत का लगभग 92 प्रतिशत आयात करता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए घरेलू खनन को बढ़ावा देने, विदेशों में खनन परिसंपत्तियां हासिल करने, कोयला धुलाई संयंत्रों का विस्तार और अलग-अलग कोयलों के मिश्रण को बेहतर बनाने के उपाय सुझाए गए हैं।

उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रस्ताव

मसौदा कम कीमत वाले और घटिया गुणवत्ता के इस्पात आयात से घरेलू उद्योग की रक्षा के लिए सुरक्षा शुल्क और प्रतिपाटन शुल्क जैसे उपायों का प्रस्ताव करता है। सुरक्षा शुल्क आयात में तेज बढ़ोतरी से घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचने या उसका खतरा होने पर लगाया जा सकता है। नीति में प्रौद्योगिकी को देश में विकसित करने, अनुसंधान, कार्यस्थल सुरक्षा और कुशल श्रमिक तैयार करने पर भी ध्यान दिया गया है। इन क्षेत्रों में प्रगति उत्पादन विस्तार को टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लौह अयस्क, लोहा बनाने का प्रमुख कच्चा माल है; इसी लोहे को आगे संसाधित करके इस्पात बनाया जाता है।
  • कोकिंग कोयले को संसाधित करके कोक बनाया जाता है, जो ब्लास्ट फर्नेस में ईंधन और अपचायक का काम करता है।
  • भारत का शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य वर्ष 2070 है।
  • मसौदा राष्ट्रीय इस्पात नीति विजन 2047 में 60.4 करोड़ टन वार्षिक कच्चा इस्पात क्षमता का लक्ष्य है।

प्रस्तावित नीति का उद्देश्य बढ़ती घरेलू मांग के अनुरूप इस्पात क्षमता तैयार करना और साथ ही आयात निर्भरता तथा उत्पादन से जुड़े उत्सर्जन को कम करना है।

Originally written on October 12, 2026 and last modified on October 12, 2026.

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