शुक्रयान मिशन में भारत के साथ जुड़ा स्वीडन

शुक्रयान मिशन में भारत के साथ जुड़ा स्वीडन

भारत का महत्वाकांक्षी शुक्र ग्रह मिशन “शुक्रयान” अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी Indian Space Research Organisation के इस मिशन में अब स्वीडन भी शामिल हो गया है। शुक्रयान एक नियोजित अंतरग्रहीय मिशन है, जिसका उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल, सतह, मौसम प्रणाली और सुपर-रोटेटिंग बादलों का अध्ययन करना है। इस मिशन में कुल 19 वैज्ञानिक पेलोड लगाए जाएंगे, जो ग्रह से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेंगे।

भारत-स्वीडन अंतरिक्ष सहयोग

स्वीडन ने वैज्ञानिक सहयोग समझौते के तहत इस मिशन में भागीदारी की है। स्वीडन के Swedish Institute of Space Physics द्वारा “वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइजर” यानी VNA उपकरण विकसित किया जाएगा। यह उपकरण सूर्य से आने वाले आवेशित कणों और शुक्र ग्रह के वायुमंडल तथा एक्सोस्फीयर के बीच होने वाली परस्पर क्रियाओं का अध्ययन करेगा। यह सहयोग भारत और स्वीडन के बीच अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों को भी दर्शाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस उपकरण से शुक्र ग्रह के वातावरण को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

मिशन की कक्षा और लॉन्च योजना

शुक्रयान मिशन को वर्ष 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। इस परियोजना के लिए 1,236 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। मिशन को भारत के भारी प्रक्षेपण यान LVM-3 के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा। अंतरिक्ष यान पहले दीर्घवृत्ताकार कक्षा में प्रवेश करेगा और उसके बाद शुक्र ग्रह की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित कक्षा में 500 किलोमीटर का पेरिआप्सिस और 60,000 किलोमीटर का एपोआप्सिस रखा गया है। यह व्यवस्था ग्रह के विस्तृत अध्ययन में सहायता करेगी।

शुक्र ग्रह के अध्ययन पर रहेगा फोकस

Indian Space Research Organisation का उद्देश्य शुक्र ग्रह के घने वायुमंडल, ज्वालामुखीय सतह और बादलों की गतिशीलता का अध्ययन करना है। वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि क्या कभी शुक्र ग्रह पर तरल जल की मौजूदगी के लिए अनुकूल परिस्थितियां थीं, इससे पहले कि वह अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव वाला ग्रह बन गया। शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह भी कहा जाता है क्योंकि इसका आकार और द्रव्यमान पृथ्वी से काफी मिलता-जुलता है। हालांकि इसका वातावरण अत्यधिक घना है और सतह का तापमान 460 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक रहता है।

मिशन की समयसीमा

मिशन का प्रारंभिक डिजाइन समीक्षा चरण अप्रैल 2026 में पूरा कर लिया गया था। योजना के अनुसार अंतरिक्ष यान 112 दिनों की यात्रा के बाद जुलाई 2028 तक शुक्र ग्रह तक पहुंच सकता है। यह मिशन भारत की अंतरग्रहीय अनुसंधान क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • शुक्र ग्रह सूर्य से दूसरा ग्रह है।
  • शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है।
  • Indian Space Research Organisation भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है।
  • LVM-3 भारत का भारी प्रक्षेपण यान है।
  • शुक्र ग्रह का सतही तापमान 460 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है।

शुक्रयान मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। स्वीडन के सहयोग से यह मिशन वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष साझेदारी को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

Originally written on May 20, 2026 and last modified on May 20, 2026.

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