वैज्ञानिकों ने खोजा असामान्य ‘मेगा-अर्थ’ GJ 523b
खगोलविदों ने GJ 523b नामक एक ऐसे एक्सोप्लैनेट की पहचान की है, जिसे ‘मेगा-अर्थ’ श्रेणी में रखा गया है। यह ग्रह आकार में पृथ्वी से लगभग 2.55 गुना बड़ा है, जबकि इसका द्रव्यमान 23.5 पृथ्वी-द्रव्यमानों के बराबर आंका गया है। इसकी औसत घनता लगभग 7.8 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर बताई गई है, जो इसे एक बेहद सघन और चट्टानी ग्रह की ओर संकेत करती है।
‘मेगा-अर्थ’ क्यों है खास
‘मेगा-अर्थ’ उन संभावित चट्टानी एक्सोप्लैनेट्स के लिए इस्तेमाल होने वाली एक प्रस्तावित श्रेणी है, जिनका आकार पृथ्वी से काफी बड़ा होता है, लेकिन वे गैस-प्रधान ग्रहों की तरह नहीं होते। सामान्यतः ऐसे ग्रहों का त्रिज्या कम से कम 2.1 पृथ्वी-त्रिज्याओं और घनता 5.5 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर या उससे अधिक मानी जाती है। GJ 523b इस परिभाषा पर खरा उतरता है, इसलिए यह खगोल विज्ञान में खास रुचि का विषय बन गया है।
कक्षा, तापमान और झुकाव ने बढ़ाई दिलचस्पी
यह ग्रह अपने मध्य-K बौने तारे की परिक्रमा केवल 17.75 दिनों में पूरी कर लेता है। इसकी अनुमानित शून्य-एल्बीडो संतुलन तापमान 538 केल्विन है, यानी यह अपने तारे के काफी करीब और गर्म वातावरण में स्थित है। सबसे दिलचस्प बात इसका न्यूनतम कक्षीय झुकाव 71.4 डिग्री है, जिससे यह एक अत्यधिक झुकी हुई ध्रुवीय कक्षा में दिखाई देता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, GJ 523b का तंत्र लगभग 169 मिलियन वर्ष पुराना है। इतनी बड़ी चट्टानी संरचना वाला ग्रह सामान्य परिस्थितियों में भारी गैसीय परत भी जमा कर सकता था, लेकिन इस ग्रह की मौजूदा बनावट इसे ग्रह-निर्माण की प्रक्रियाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।
कैसे हुई पहचान
इस ग्रह के गुणों का अनुमान ट्रांजिट डेटा और रेडियल वेलोसिटी मापों के आधार पर लगाया गया। नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट यानी TESS ने तारे की रोशनी में आने वाली कमी को दर्ज किया, जबकि एरिज़ोना स्थित WIYN 3.5-मीटर टेलीस्कोप के NEID स्पेक्ट्रोग्राफ ने तारे की गति में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को मापा।
ट्रांजिट फोटोमेट्री से यह पता चलता है कि ग्रह जब अपने तारे के सामने से गुजरता है तो प्रकाश कितना घटता है। वहीं रेडियल वेलोसिटी तकनीक तारे के उस ‘डगमगाने’ को पकड़ती है, जो ग्रह के गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है। इन्हीं दोनों तरीकों के संयोजन से ग्रह का आकार, द्रव्यमान और घनता अधिक भरोसेमंद ढंग से तय की जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सौरमंडल के बाहर किसी तारे की परिक्रमा करने वाले ग्रहों को एक्सोप्लैनेट या एक्स्ट्रासोलर प्लैनेट कहा जाता है।
- ट्रांजिट फोटोमेट्री में तारे की रोशनी में आने वाली हल्की गिरावट से ग्रह की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
- रेडियल वेलोसिटी विधि तारे की गति में आए बदलाव को मापकर ग्रह के गुरुत्वीय प्रभाव की पहचान करती है।
- किसी ग्रह की bulk density उसके द्रव्यमान और आयतन से निकाली जाती है और इससे उसकी संरचना का अनुमान लगाया जाता है।
GJ 523b जैसी खोजें यह दिखाती हैं कि ब्रह्मांड में ग्रहों की बनावट पृथ्वी और बृहस्पति जैसे परिचित उदाहरणों से कहीं अधिक विविध हो सकती है। ऐसे ग्रह भविष्य में चट्टानी ग्रहों के निर्माण, उनकी संरचना और विकास को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।