वेल्लालोर में प्राचीन व्यापार और बसावट के नए प्रमाण मिले

वेल्लालोर में प्राचीन व्यापार और बसावट के नए प्रमाण मिले

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के वेल्लालोर में नॉय्यल नदी तल से 1,000 से अधिक पुरावशेष मिलने से क्षेत्र के प्राचीन इतिहास पर नई रोशनी पड़ी है। तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) की खुदाई में ऐसे अवशेष सामने आए हैं, जो प्रारंभिक ऐतिहासिक और ऐतिहासिक काल से जुड़े हैं। कुछ वस्तुओं की तिथि ईसा पूर्व पहली शताब्दी से लेकर ईसा पश्चात तीसरी शताब्दी तक मानी जा रही है।यह खोज केवल कुछ बिखरी हुई वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह संकेत भी मिलता है कि वेल्लालोर कभी एक विकसित बसावट और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र रहा होगा। खुदाई के पहले चरण में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं, जिससे इस स्थल का पुरातात्विक महत्व और बढ़ गया है।

वेल्लालोर में क्या मिला

थेनीस्वरर मंदिर के पास तीन स्थलों पर चार अलग-अलग स्थानों में खुदाई की जा रही है। यहां से रोमन तांबे के सिक्के, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, आभूषण, पत्थर की संरचनाएं, जल-मार्ग, फर्श सामग्री और चूने से लेपित एक गोल गड्ढा मिला है।इसके अलावा, बीज-निर्माण, लौह और इस्पात निर्माण, बुनाई के औजार, शंख-आभूषण निर्माण और मिट्टी के बर्तन बनाने के प्रमाण भी मिले हैं। ये सभी संकेत बताते हैं कि यह क्षेत्र केवल आवासीय नहीं, बल्कि कारीगरी और उत्पादन गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ था।

प्राचीन व्यापारिक केंद्र के संकेत

रोमन तांबे के सिक्कों की मौजूदगी दक्षिण भारत में दूरस्थ व्यापार के महत्वपूर्ण संकेतों में गिनी जाती है। वेल्लालोर से मिले ऐसे सिक्के इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह स्थल पश्चिमी और पूर्वी तटों को जोड़ने वाले व्यापार मार्गों से जुड़ा हो सकता है।पुरातत्वविदों के अनुसार, यहां मिले अवशेष 1वीं, 5वीं, 6वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं शताब्दी के साथ-साथ ब्रिटिश काल से भी संबंधित हो सकते हैं। कुछ वस्तुएं लगभग 2,100 वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र लंबे समय तक मानव गतिविधियों का केंद्र बना रहा।

खुदाई का महत्व और आगे की योजना

यह खुदाई 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुई थी और इसे तमिलनाडु के आठ स्थलों को शामिल करने वाली बड़ी परियोजना का हिस्सा माना जा रहा है। वेल्लालोर में मिली परतें और संरचनाएं यह समझने में मदद करेंगी कि प्राचीन तमिल क्षेत्र में बसावट, शिल्प और व्यापार किस तरह विकसित हुए।खुदाई अक्टूबर 2026 तक जारी रहने की योजना है। इसके बाद Excavation Director K. Suresh के नेतृत्व में प्राप्त निष्कर्षों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • TNSDA तमिलनाडु में पुरातात्विक अनुसंधान और खुदाई के लिए जिम्मेदार राज्य एजेंसी है।
  • नॉय्यल नदी कावेरी बेसिन से जुड़ी एक सहायक नदी प्रणाली है, जो तमिलनाडु में स्थित है।
  • रोमन तांबे के सिक्के प्राचीन भारत में लंबी दूरी के व्यापार के महत्वपूर्ण पुरातात्विक संकेत माने जाते हैं।
  • वेल्लालोर को मिले प्रमाणों के आधार पर एक प्राचीन व्यापारिक और बसावट केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

वेल्लालोर की यह खोज दक्षिण भारत के प्राचीन शहरीकरण, शिल्प उत्पादन और समुद्री-स्थलीय व्यापार नेटवर्क को समझने में अहम साबित हो सकती है। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ेगी, इस स्थल से तमिलनाडु के इतिहास के और भी महत्वपूर्ण अध्याय सामने आने की संभावना है।

Originally written on July 20, 2026 and last modified on July 20, 2026.

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