वीओसी बंदरगाह का टर्मिनल बना हरित, समुद्री परिवहन को मिलेगा बढ़ावा

वीओसी बंदरगाह का टर्मिनल बना हरित, समुद्री परिवहन को मिलेगा बढ़ावा

तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह के तूतीकोरिन अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल को 22 अक्टूबर 2026 को हरित टर्मिनल का दर्जा दिया गया। इसकी परिचालन मशीनरी का पूरी तरह विद्युतीकरण होने के बाद केंद्रीय नौवहन सचिव ने बंदरगाह परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान यह दर्जा प्रदान किया। यह कदम बंदरगाह संचालन में पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ समुद्री परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम है।

पूरी तरह विद्युत उपकरणों से संचालित टर्मिनल

तूतीकोरिन अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल ने 16 सितंबर 2024 को काम शुरू किया था। शुरुआत से ही यहां क्रेन और कंटेनर उठाने-ले जाने वाले रीच स्टैकर विद्युत चालित थे। 20 अक्टूबर 2026 को 13 विद्युत आंतरिक स्थानांतरण वाहनों को भी संचालन के लिए रवाना किया गया। ये वाहन बंदरगाह के भीतर जहाजों से कंटेनर उतारने वाले घाट और भंडारण यार्ड जैसे परिचालन क्षेत्रों के बीच कंटेनरों को ले जाते हैं।

टर्मिनल के सभी परिचालन उपकरणों के विद्युतीकरण के बाद उसे हरित टर्मिनल घोषित किया गया। डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन से चलने वाली मशीनों के स्थान पर विद्युत उपकरणों का उपयोग बंदरगाह के स्थानीय प्रदूषण और परिचालन से जुड़े उत्सर्जन को कम करने में सहायक हो सकता है।

स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर बंदरगाह का जोर

वीओसी बंदरगाह मन्नार की खाड़ी के तट पर स्थित है। यह भारत के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल है और यहां व्यापारिक गतिविधियों का इतिहास 123 ईस्वी तक जाता है। बंदरगाह में 18,400 करोड़ रुपये से अधिक की समुद्री अवसंरचना परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। इनमें मेथनॉल की आपूर्ति और ईंधन भरने की प्रायोगिक सुविधा, हरित हाइड्रोजन की प्रायोगिक परियोजना तथा पवन ऊर्जा सुविधाएं शामिल हैं। जहाजों को मेथनॉल ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मेथनॉल बंकरिंग कहा जाता है।

10 अगस्त 2026 को वीओसी बंदरगाह को भारत का पहला स्कोप-2 उत्सर्जन-मुक्त प्रमुख बंदरगाह माना गया था। इसके पास ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ 50001:2018 प्रमाणन भी है। ये पहलें बंदरगाह के ऊर्जा उपयोग को अधिक कुशल बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।

बाहरी बंदरगाह से बढ़ेगी क्षमता

बंदरगाह की बाहरी बंदरगाह परियोजना पर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इसके पूरा होने पर सालाना माल-हैंडलिंग क्षमता में 40 लाख टन की वृद्धि की योजना है। यह विस्तार दक्षिण भारत में माल के पुनः हस्तांतरण केंद्र के रूप में तमिलनाडु की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से जुड़ा है। वीओसी बंदरगाह की मौजूदा कुल वार्षिक माल-हैंडलिंग क्षमता 8.2 करोड़ टन है। बंदरगाह परियोजनाओं की एक अलग समीक्षा में 18,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली योजनाएं भी शामिल थीं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वीओसी बंदरगाह तमिलनाडु के तूतीकोरिन में मन्नार की खाड़ी के तट पर स्थित है।
  • तूतीकोरिन अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल ने 16 सितंबर 2024 को संचालन शुरू किया।
  • वीओसी बंदरगाह की वार्षिक माल-हैंडलिंग क्षमता 8.2 करोड़ टन है।
  • आईएसओ 50001:2018 ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानक है।

टर्मिनल का पूर्ण विद्युतीकरण और बंदरगाह की स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं मिलकर भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

Originally written on October 22, 2026 and last modified on October 22, 2026.

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