वंदे भारत ट्रेनसेट का 100वां मील का पत्थर
भारतीय रेलवे ने 2 मई 2026 को वंदे भारत ट्रेनसेट के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 100वां ट्रेनसेट तैयार किया। यह आधुनिक ट्रेनसेट रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री में निर्मित किया गया है। देश में सेमी-हाई-स्पीड रेल सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह पहल भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
वंदे भारत निर्माण नेटवर्क
वंदे भारत ट्रेनसेट का निर्माण देश के तीन प्रमुख कोच निर्माण कारखानों में किया जाता है। इनमें चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री और रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री शामिल हैं। ये सभी इकाइयां मिलकर आधुनिक और तेज गति वाली ट्रेनों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
100वें ट्रेनसेट की तकनीकी विशेषताएं
रायबरेली में बने इस 16-कोच चेयर-कार ट्रेनसेट में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसमें सीमेनस प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो बेहतर गति और ऊर्जा दक्षता प्रदान करता है। इसके अलावा ट्रेन में पूरी तरह सील्ड गैंगवे, ऑटोमैटिक प्लग डोर, शोर कम करने की प्रणाली और ‘कवच’ नामक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली शामिल है। ‘कवच’ एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करता है।
वंदे भारत सेवाएं और नए वेरिएंट
वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार अब विभिन्न रूटों और स्वरूपों में हो रहा है। 2 मई 2026 से जम्मू–श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत हुई, जो पहली बार इन दोनों शहरों के बीच सीधा रेल संपर्क प्रदान करती है। यह 20 कोच वाली ट्रेन लगभग 4 घंटे 50 मिनट में यात्रा पूरी करती है और सप्ताह में छह दिन संचालित होती है। इसके अलावा, लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर सेवाएं भी शुरू की गई हैं। जनवरी 2026 से ये सेवाएं 800 से 1200 किलोमीटर तक की दूरी के लिए उपलब्ध हैं। इनका पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2024 में तैयार किया गया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वंदे भारत ट्रेनसेट की शुरुआत भारत में वर्ष 2018 में हुई थी।
- 100वां ट्रेनसेट रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री में निर्मित हुआ है।
- इन ट्रेनों में वितरित ट्रैक्शन सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
- ‘कवच’ एक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक है।
वंदे भारत का विकास और भविष्य
वंदे भारत ट्रेन कार्यक्रम ने 2018 में मात्र दो ट्रेनसेट से शुरुआत की थी, लेकिन 2026 तक यह तेजी से विकसित होकर चेयर-कार और स्लीपर दोनों प्रकार की सेवाओं में विस्तार कर चुका है। यह परियोजना न केवल यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव देती है, बल्कि भारत को आधुनिक रेल तकनीक के क्षेत्र में भी सशक्त बनाती है। आने वाले समय में वंदे भारत ट्रेनों का नेटवर्क और भी व्यापक होने की उम्मीद है।